जेपीएससी भर्ती परीक्षा में धांधली का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, दोबारा परीक्षा कराने की मांग
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नई दिल्ली: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा 2025 में हुई कथित गड़बड़ियों का विवाद अब सर्वोच्च न्यायालय की दहलीज पर पहुंच गया है। परीक्षा में धांधली के गंभीर आरोपों के बाद इसे रद्द करने और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर शीर्ष अदालत में याचिका दायर की गई है।

सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में जांच की मांग याचिकाकर्ता ने मांग की है कि परीक्षा में हुई अनियमितताओं की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति का गठन किया जाए। इस समिति की अध्यक्षता किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश (रिटायर्ड जज) द्वारा किए जाने का आग्रह किया गया है। याचिका के अनुसार, परीक्षा की पारदर्शिता पर उठे सवालों का जवाब तलाशना जरूरी है ताकि योग्य अभ्यर्थियों का आयोग और परीक्षा प्रणाली में विश्वास बरकरार रह सके।

प्रश्नपत्र से लेकर परिणाम तक की गहन जांच याचिका में केवल परीक्षा रद्द करने की मांग नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया की बारीकी से पड़ताल करने पर जोर दिया गया है। इसमें प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और अंतिम परिणाम घोषित होने तक के हर चरण को जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है।

ओएमआर (OMR) स्कैनिंग और तकनीकी ऑडिट पर जोर याचिका में सबसे महत्वपूर्ण मांग ओएमआर स्कैनिंग, कोडिंग और मूल्यांकन प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने की है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि तकनीक के जरिए किए गए धांधली के दावों की पुष्टि के लिए एक तकनीकी ऑडिट अनिवार्य है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि परिणाम तैयार करने वाली प्रणाली में क्या कोई हेरफेर की गई थी या नहीं।

19 अप्रैल की परीक्षा रद्द करने की गुहार 19 अप्रैल 2026 को आयोजित हुई इस प्रारंभिक परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश है। इसी को देखते हुए याचिका में परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर नए सिरे से इसका आयोजन कराने का अनुरोध किया गया है। राज्य की इस प्रतिष्ठित परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए याचिकाकर्ता ने इसे अत्यंत आवश्यक बताया है।

अब आगे क्या? झारखंड की सिविल सेवा परीक्षा की शुचिता पर लगे इन गंभीर आरोपों पर अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। फिलहाल अदालत में होने वाली अगली सुनवाई और इस पर संबंधित पक्षों (जेपीएससी और राज्य सरकार) का क्या जवाब आता है, यह देखना दिलचस्प होगा। अदालत के फैसले पर ही हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य निर्भर करेगा।

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