परिसीमन बिल से पहले PM मोदी का मास्टरस्ट्रोक : NDA का कुनबा बढ़ाकर बहुमत की राह हुई आसान
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नई दिल्ली: संसद के आगामी सत्र को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए (NDA) गठबंधन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री ने हाल ही में एनडीए में शामिल हुए 45 सांसदों के साथ विशेष बैठक की। इस बैठक में एनसीपीआई (NCPI), शिवसेना (शिंदे गुट), आरपीआई (अठावले गुट), और एआईएडीएमके समेत कई सहयोगी दलों के नेता शामिल हुए।

NCPI के मुस्लिम सांसदों की मौजूदगी रही चर्चा में बैठक में तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एनडीए में आए एनसीपीआई (NCPI) के 20 सांसद आकर्षण का केंद्र रहे। इस बार खलील-उर-रहमान, अबु ताहेर खान और यूसुफ पठान जैसे मुस्लिम सांसद भी प्रधानमंत्री आवास पहुंचे। यूसुफ पठान ने स्पष्ट किया कि वे देशहित में हर विधेयक का समर्थन करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में पश्चिम बंगाल में लाउडस्पीकर हटाने और मतदाता सूची में सुधार जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जिस पर सरकार ने सकारात्मक आश्वासन दिया है।

360 का जादुई आंकड़ा: चुनौती अभी बाकी सरकार की इस कवायद का मुख्य उद्देश्य संसद में संख्या बल को मजबूत करना है। संवैधानिक संशोधनों और परिसीमन जैसे बड़े बिलों के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी करीब 360 सांसदों का समर्थन अनिवार्य है। महिला आरक्षण बिल के समय सरकार को मात्र 298 वोट ही मिल पाए थे। एनडीए के नए सहयोगियों (कुल 324 सांसद) के जुड़ने से स्थिति बेहतर हुई है, लेकिन पूर्ण बहुमत के लिए सरकार अभी भी डीएमके (22) और वाईएसआर कांग्रेस (4) जैसे दलों पर नजरें गड़ाए हुए है।

शिंदे और बादल की सक्रियता से बढ़ी सरगर्मी महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी प्रधानमंत्री से मुलाकात कर संसद में अपनी पार्टी की भूमिका और राज्य के विकास पर चर्चा की। शिंदे ने परिसीमन बिल का समर्थन करते हुए कहा कि वर्तमान लोकसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या इतनी अधिक है कि काम करना चुनौतीपूर्ण होता है। वहीं, शिरोमणि अकाली दल के सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री से मुलाकात ने पंजाब की सियासत में भी हलचल पैदा कर दी है, जिससे गठबंधन की वापसी के कयास लगाए जा रहे हैं।

विशेष सत्र की तैयारी? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार अगस्त में ही संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। नए संसद भवन का ढांचा भी भविष्य में सीटों की संख्या बढ़ाने को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। पीएम मोदी की यह रणनीतिक बैठक यह संकेत देती है कि सरकार अब परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे बड़े संवैधानिक विधेयकों को पारित कराने के लिए पूरी तरह कमर कस चुकी है।

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