दतिया में हार से बौखलाई BJP: CM मोहन यादव की हाई-लेवल बैठक, भीतरघात की जांच के लिए बनी समिति
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मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली करारी हार ने बीजेपी के भीतर खलबली मचा दी है। पार्टी इस हार को बेहद गंभीरता से ले रही है, जिसके चलते मंगलवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने सरकारी आवास पर एक आपातकालीन उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई।

हार के कारणों पर मंथन और रणनीति बैठक में सीएम मोहन यादव के साथ डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, राजेंद्र शुक्ल, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और कई वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री मौजूद रहे। चर्चा का मुख्य केंद्र उपचुनाव में मिली हार के पीछे छिपे वास्तविक कारणों को खोजना और भविष्य की चुनावी राजनीति के लिए डैमेज कंट्रोल करना था।

जांच के लिए गठित हुई दो सदस्यीय समिति बीजेपी ने हार के कारणों का बारीकी से विश्लेषण करने के लिए प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा की दो सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेगी और अपनी रिपोर्ट सीधे प्रदेश अध्यक्ष को सौंपेगी।

भीतरघात के आरोपों से सियासी पारा चढ़ा बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने बैठक में गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने नेतृत्व को कुछ ऑडियो और वीडियो सबूत सौंपे हैं, जिनमें पार्टी के ही कुछ नेताओं पर भीतरघात करने का दावा किया गया है। इन आरोपों ने संगठन के भीतर गुटबाजी और अनुशासन पर नए सिरे से सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूरी जिला कार्यकारिणी भंग समीक्षा के बाद पार्टी ने कड़ा रुख अपनाते हुए दतिया की पूरी जिला संगठनात्मक कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। इसमें जिला पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य और मंडल स्तर के नेता शामिल हैं। यह कदम संगठन में भारी बदलाव के संकेत दे रहा है।

नरोत्तम मिश्रा का टिकट और स्थानीय असंतोष राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारना बीजेपी के लिए भारी पड़ा। टिकट वितरण के बाद नरोत्तम समर्थकों का सड़क पर उतरना और विरोध प्रदर्शन करना पार्टी के वोट बैंक में सेंध का बड़ा कारण बना।

उपचुनाव के आंकड़े और परिणाम कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने इस मुकाबले में बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों के अंतर से हराया। जहां कांग्रेस को 66,757 वोट मिले, वहीं बीजेपी 60,741 वोटों तक सिमट गई। इस हार ने बीजेपी के मिशन और आगामी चुनावों की तैयारियों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब सभी की नजरें जांच समिति की रिपोर्ट और उस पर होने वाली अनुशासनात्मक कार्रवाई पर टिकी हैं।

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