10 घंटे की मूसलाधार बारिश ने डुबाया असम: तबाही के मंजर में श्रवण कुमार बना मसीहा
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असम पिछले 17 दिनों से भीषण बाढ़ की चपेट में है। कुदरत का यह कहर अब तक 87 जिंदगियों को लील चुका है। शिवसागर जिला इस आपदा का केंद्र बना हुआ है, जहां अकेले 40 से ज्यादा लोगों की जान गई है। राज्य में 13 हजार से ज्यादा घर जमींदोज हो चुके हैं और 2 लाख लोग बेघर होकर विस्थापन का दर्द झेलने को मजबूर हैं।

सिस्टम को चौंकाने वाला बारिश का पैटर्न इस बार की बाढ़ ने मौसम विज्ञानियों को भी हैरत में डाल दिया है। 1 जून से 15 जुलाई तक असम में सामान्य से 30 प्रतिशत कम बारिश हुई, लेकिन 18 जुलाई की शाम से शुरू हुई 10 घंटे की मूसलाधार बारिश ने सब कुछ बदल दिया। कुछ इलाकों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से 400 से 500 प्रतिशत तक दर्ज किया गया। नेपाल खुटी जैसे इलाकों में महज कुछ मिनटों में पानी का स्तर 1 फुट से बढ़कर 4 फुट तक पहुंच गया।

सुरक्षित माने जाने वाले इलाके भी डूबे असम की इस बाढ़ की दूसरी चौंकाने वाली बात यह है कि ऊपरी असम के वे इलाके भी डूब गए, जिन्हें अब तक सुरक्षित जोन माना जाता था। शिवसागर और जोरहाट जैसे जिलों में, जहां छोटी नहरों के जरिए पानी तेजी से निकल जाता था, वहां इस बार सबसे भीषण तबाही हुई। 50 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि जलमग्न होने से किसानों की कमर टूट गई है।

सेना का ऑपरेशन जल राहत तबाही के इस मंजर में सरकार और सेना मिलकर मोर्चा संभाले हुए हैं। भारतीय सेना की स्पियर कोर और 57वीं माउंटेन डिवीजन ऑपरेशन जल राहत के तहत दिन-रात बचाव कार्य में जुटी है। वायुसेना के हेलीकॉप्टर अब तक 300 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाल चुके हैं और ड्रोन के जरिए प्रभावित क्षेत्रों की निरंतर निगरानी की जा रही है।

विपत्ति में श्रवण कुमार बने उम्मीद की किरण इस आपदा के बीच इंसानी जज्बे की एक मिसाल भी देखने को मिली है। शिवसागर के 25 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर श्रवण कुमार ने साबित कर दिया कि हौसला हो तो बड़ी से बड़ी मुसीबत को मात दी जा सकती है। अपना घर बह जाने के बावजूद, श्रवण और उनके दोस्तों ने हार नहीं मानी।

अपनी 6 छोटी नावों के साथ वे बाढ़ के पानी में उतरे और करीब 2 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। गांधीजी के शब्दों में कहें तो संकट के समय ही मनुष्य का असली चरित्र सामने आता है। श्रवण और उनके साथियों का यह साहस न केवल हजारों लोगों के लिए वरदान साबित हुआ, बल्कि यह भी दिखाता है कि सामूहिक शक्ति किसी भी विपदा का सामना करने में सक्षम है।

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