यूरोप की जीवनरेखा पर मंडराया संकट: डेन्यूब नदी क्यों बन रही है रेगिस्तान?
News Image

यूरोप की दूसरी सबसे लंबी और महत्वपूर्ण नदी डेन्यूब इन दिनों भीषण सूखे की चपेट में है। जिस नदी को यूरोप की गंगा कहा जाता है, आज वह खुद अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। जल स्तर में आई भारी गिरावट ने न केवल 10 देशों की अर्थव्यवस्था को हिला दिया है, बल्कि एक बड़े ऊर्जा संकट को भी जन्म दे दिया है।

क्यों यूरोप की गंगा है डेन्यूब?

भारत में गंगा के समान ही डेन्यूब का महत्व यूरोप के लिए है। यह नदी मध्य और पूर्वी यूरोप के 10 देशों के लिए पेयजल, सिंचाई, पर्यटन और व्यापार का प्राथमिक स्रोत है। यह जर्मनी के ब्लैक फॉरेस्ट से निकलकर 2,850 किलोमीटर की यात्रा तय करती है और 10 देशों—जर्मनी, ऑस्ट्रिया, स्लोवाकिया, हंगरी, क्रोएशिया, सर्बिया, बुल्गारिया, रोमानिया, मोल्दोवा और यूक्रेन—से गुजरती हुई काला सागर में गिरती है।

हंगरी के न्यूक्लियर पावर प्लांट पर ताला

डेन्यूब के सूखने का सबसे खतरनाक असर हंगरी में देखने को मिला है। पानी की कमी के चलते देश का पाक्स न्यूक्लियर प्लांट बंद करना पड़ा है। इस प्लांट से हंगरी को 40% से अधिक बिजली मिलती है। 44 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है जब नदी में रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए पर्याप्त पानी नहीं बचा।

सूखने के पीछे के असली गुनहगार

विशेषज्ञों के अनुसार, डेन्यूब की यह दुर्दशा अचानक नहीं हुई है, इसके पीछे कई गंभीर कारण हैं:

चौतरफा वार: परिवहन से पर्यावरण तक खतरा

सूखती डेन्यूब ने कई मोर्चों पर संकट पैदा कर दिया है। जल स्तर घटने से मालवाहक जहाज नहीं चल पा रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो रहा है। कृषि क्षेत्र में सिंचाई का संकट गहरा गया है और जलीय जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट होने से इकोसिस्टम खतरे में है।

दुनिया के लिए एक चेतावनी

डेन्यूब का यह संकट केवल यूरोप तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है। यदि जलवायु परिवर्तन की गति नहीं थमी, तो आने वाले समय में गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु जैसी बड़ी नदियां भी इसी तरह के भयावह सूखे का सामना कर सकती हैं। अब समय आ गया है कि जल संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी को पर्यावरण का शौक नहीं, बल्कि अस्तित्व की अनिवार्यता माना जाए।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

बच्चों के जूते साफ कर पढ़ाते हैं सम्मान का पाठ, इस शिक्षक का वीडियो देख दुनिया हुई कायल

Story 1

गाली देना कूल नहीं, युवाओं को मनु भाकर की नसीहत—शब्द ही हैं आपकी असली पहचान

Story 1

बिहार की सियासत में भूचाल: बांकीपुर में PK की एंट्री से हिल गई NDA, तेजस्वी के लिए भी खतरे की घंटी

Story 1

जेल की कालकोठरी में गुजारी रातें: सलमान खान ने बयां किया अपना सबसे खौफनाक अनुभव

Story 1

# रणनीतिकार से जननेता तक: प्रशांत किशोर की अग्निपरीक्षा

Story 1

अब अहमदाबाद की बारी: ग्लासगो से भारत को सौंपी गई कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की कमान

Story 1

बांकीपुर में जन सुराज का दबदबा: बढ़त पर गदगद हुईं प्रशांत किशोर की पत्नी, कहा- यह जनता की जीत

Story 1

दतिया उपचुनाव: घनश्याम सिंह का बड़ा दावा, नरोत्तम मिश्रा को लेकर कही ये बात!

Story 1

लगातार चोटिल हो रहे खिलाड़ी: क्या फेल हो गया है BCCI का मेडिकल सिस्टम?

Story 1

शुभमन गिल के सामने इतिहास रचने का मौका, श्रीलंका सीरीज में निशाने पर होंगे दो बड़े रिकॉर्ड