पहले छात्रों से माफी मांगें PM मोदी : जंतर-मंतर हिंसा पर CJP संस्थापक की दो टूक
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नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने हालिया प्रदर्शनों के दौरान उनके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले छात्रों को माफ करने की अपील की थी।

दीपके ने प्रधानमंत्री से सीधे तौर पर सवाल किया है कि क्या वे 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ हुई बर्बरता के लिए माफी मांगेंगे।

अत्याचार का हिसाब पहले क्यों नहीं?

अभिजीत दीपके ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री को केवल अपनी आलोचना पर ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, जिन छात्रों के सिर फूटे, जिन पर पेलेट गन चलाई गई और जिनके हाथ-पैर टूटे, पहले उनसे माफी मांगी जानी चाहिए। उसके बाद ही क्षमा की बात शोभा देती है।

दीपके के अनुसार, 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई बेहद हिंसक थी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार के कंधों पर होनी चाहिए।

इंस्टाग्राम वीडियो नहीं, मुकदमों की वापसी चाहिए

प्रधानमंत्री मोदी की माफ करने वाली अपील पर दीपके ने इसे महज एक औपचारिकता करार दिया। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार वाकई छात्रों को सुधारने का अवसर देना चाहती है, तो यह केवल सोशल मीडिया वीडियो तक सीमित नहीं होना चाहिए।

दीपके ने कहा, केवल इंस्टाग्राम पर वीडियो डालकर सहानुभूति नहीं जुटाई जा सकती। सरकार को स्पष्ट निर्देश देने चाहिए कि छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं। उनके मुताबिक, केस खत्म किए बिना क्षमा की बात करना बेमानी है।

प्रधानमंत्री ने क्या कहा था?

हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने एक वीडियो संदेश में कहा था कि युवावस्था में गलतियां हो सकती हैं और समाज को उन्हें माफ कर आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि छात्रों को अदालतों के चक्कर में फंसाना या उनका सामाजिक बहिष्कार करना किसी समस्या का अंतिम समाधान नहीं है।

IT सेल पर गंभीर सवाल

अभिजीत दीपके ने इस मुद्दे पर बीजेपी आईटी सेल को भी घेरे में लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी से जुड़े कई अकाउंट्स, जो प्रधानमंत्री द्वारा फॉलो किए जाते हैं, वे लंबे समय से महिलाओं के प्रति अपमानजनक भाषा और रेप की धमकियों का उपयोग करते रहे हैं।

दीपके ने सवाल किया, यदि छात्रों पर अभद्र भाषा के लिए केस दर्ज हो सकते हैं, तो आईटी सेल के उन लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती जिन्हें शीर्ष नेतृत्व का संरक्षण प्राप्त है?

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