सफलता सिर्फ मेडल नहीं, बल्कि उन मुश्किलों को पार करने का सफर है, जो हर कदम पर हमारी परीक्षा लेती हैं। दिल्ली के द्वारका के रहने वाले 23 वर्षीय जूडो खिलाड़ी हर्ष सिंह की कहानी इसी संघर्ष और अटूट जुनून की मिसाल है।
दिल्ली के ककरोला इलाके के एक छोटे से 60 गज के घर में रहने वाले हर्ष के लिए राह आसान नहीं थी। पिता एक निजी फैक्ट्री में काम करते हैं और परिवार की मासिक आय महज 10 हजार रुपये है। सीमित संसाधनों के बावजूद, माता-पिता ने हर्ष के सपनों को कभी मरने नहीं दिया और उनके प्रशिक्षण व डाइट के लिए हर संभव त्याग किया।
साल 2017 हर्ष के करियर का सबसे काला अध्याय रहा, जब दिल्ली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के दौरान उनकी कॉलर बोन टूट गई। चोट के दर्द के अलावा, लगातार अंतरराष्ट्रीय ट्रॉयल्स में हार और रिश्तेदारों की खेल छोड़ने की सलाह ने उनका मनोबल तोड़ दिया था। उन्होंने कई बार हार मान लेने का मन बनाया, लेकिन उनके कोच, माता-पिता और भाई ने उन्हें टूटने नहीं दिया।
हर्ष सिंह ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में इतिहास रच दिया। 60 किग्रा जूडो स्पर्धा के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज को 10-0 से करारी शिकस्त देकर हर्ष ने स्वर्ण पदक जीता। वे राष्ट्रमंडल खेलों के जूडो इतिहास में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बन गए हैं।
हर्ष की मेहनत का फल उन्हें 2023 में आईटीबीपी में नौकरी के रूप में मिला और मार्च 2024 में वे भारतीय सेना (CMP कैंप, बेंगलुरु) में हेड कांस्टेबल के पद पर शामिल हुए। सेना में मिलने वाली बेहतर ट्रेनिंग, जर्मन कोचों का मार्गदर्शन और डाइट के स्तर में सुधार ने उनके खेल को दुनिया भर में पहचान दिलाई।
आज हर्ष की सफलता उन हजारों युवाओं के लिए एक मिसाल है, जो आर्थिक तंगी के कारण अपने सपनों को दबा देते हैं। हर्ष का मानना है कि मुश्किल परिस्थितियां इंसान को कमजोर नहीं, बल्कि बेहतर बनाने के लिए होती हैं। यदि परिवार का साथ, सही गुरु का मार्गदर्शन और खुद पर विश्वास हो, तो कोई भी बाधा मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।
Golden glory continues for Bharat! 🥇🇮🇳
— Dr Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) July 31, 2026
Congratulations to Khelo India Athlete Harsh Singh for striking Gold in the Men s Judo 60 KG Final with a spectacular 10-0 victory at the Commonwealth Games. #Cheer4Bharat #CWG2026 pic.twitter.com/7daTxNYc2R
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