केसरिया जर्सी पर छिड़े विवाद पर मनप्रीत सिंह का करारा जवाब: फैसला हमारा, राजनीति से दूर
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भारतीय हॉकी टीम की नई केसरिया जर्सी को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच दिग्गज खिलाड़ी मनप्रीत सिंह ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जर्सी का रंग बदलने का निर्णय पूरी तरह से तकनीकी और टीम का अपना फैसला था, इसमें किसी बाहरी दबाव या राजनीति का कोई स्थान नहीं है।

तकनीकी कारण बना बदलाव की वजह मनप्रीत ने बताया कि यह फैसला केवल खेल की गुणवत्ता सुधारने के लिए लिया गया। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय हॉकी में नीले रंग का टर्फ (मैदान) मानक बन चुका है। चूंकि खिलाड़ियों की पुरानी जर्सी और मोजे भी नीले रंग के थे, इसलिए मैच के दौरान विजुअल क्लैश की समस्या हो रही थी। इससे मैदान पर खिलाड़ियों को एक-दूसरे को पहचानने में कठिनाई हो रही थी।

राष्ट्रीय ध्वज से मिलती है प्रेरणा विवादों को खारिज करते हुए मनप्रीत ने याद दिलाया कि अतीत में भी टीम ने पीले रंग की जर्सी पहनी है। उन्होंने कहा, केसरिया रंग हमारे राष्ट्रीय ध्वज का हिस्सा है। एक खिलाड़ी के तौर पर यह हमें मैदान पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह रंग गर्व का प्रतीक है, न कि किसी विवाद का।

हॉकी इंडिया ने भी दी सफाई मनप्रीत के बयान का समर्थन करते हुए हॉकी इंडिया ने भी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की है। एक बयान में कहा गया कि यह फैसला खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के साथ विस्तृत बातचीत के बाद लिया गया। इसका एकमात्र उद्देश्य मैदान पर दृश्यता (विजिबिलिटी) में स्पष्टता लाना था ताकि खिलाड़ी खेल के दौरान बेहतर तालमेल बिठा सकें।

राजनीतिक बयानबाजी पर विराम? गौरतलब है कि जर्सी के रंग पर देश के कई राजनेताओं और पूर्व खिलाड़ियों ने सवाल उठाए थे। पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा जैसे दिग्गजों ने भी इस बदलाव पर अपनी आपत्ति जताई थी। हालांकि, खिलाड़ियों द्वारा स्पष्टीकरण दिए जाने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह विवाद थमता है या हॉकी के मैदान से शुरू हुई यह बहस आगे भी जारी रहेगी।

टूर्नामेंट से पहले तैयारी पर फोकस भारतीय टीम जल्द ही नीदरलैंड और बेल्जियम में होने वाले FIH पुरुष और महिला वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने जा रही है। ऐसे में जर्सी विवाद को पीछे छोड़कर पूरी टीम अब अपना ध्यान आगामी टूर्नामेंट और पदक जीतने की रणनीति पर केंद्रित कर रही है। 14-15 अगस्त से शुरू होने वाले इन मुकाबलों में टीम का प्रदर्शन ही इस चर्चा को पूरी तरह खत्म करने का सबसे बड़ा जरिया होगा।

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