रूस में बैठा था सदाकत, फिर भी बिहार में दर्ज हो गई FIR! पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
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किशनगंज का मामला बिहार में NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान दर्ज की गई एफआईआर अब विवादों के घेरे में है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें किशनगंज के एक युवक मोहम्मद सदाकत ने दावा किया है कि वह पिछले चार महीनों से रूस में है, फिर भी उसका नाम प्रदर्शन से जुड़ी एफआईआर में शामिल कर दिया गया है।

मैं रूस में हूं, एफआईआर में नाम कैसे आया? वायरल वीडियो में सदाकत ने बताया कि वह किशनगंज जिले के बहादुरगंज के वार्ड नंबर-12 का निवासी है। उसका आरोप है कि 24 जुलाई को LRP चौक पर हुए प्रदर्शन में उसकी कोई भूमिका नहीं थी, क्योंकि वह उस समय भारत में मौजूद ही नहीं था। सदाकत ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि उसके खिलाफ दर्ज गलत केस को तुरंत वापस लिया जाए।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस इस वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने बिहार पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई लोग इसे पुलिस की लापरवाही बता रहे हैं, तो कुछ इसे धार्मिक पहचान से जोड़कर देख रहे हैं। नेटिजन्स के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, जबकि कुछ लोग व्यंग्य में बिहार इज़ नॉट फॉर बिगिनर्स जैसी बातें लिख रहे हैं। हालांकि, इन दावों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस का रुख और रहस्यमयी डिलीट हुआ ट्वीट किशनगंज के पुलिस अधीक्षक (SP) हरि मोहन शुक्ला ने इस मामले पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने केवल इतना कहा कि यदि किसी को शिकायत है, तो वह पुलिस से संपर्क करे, नियमानुसार जांच की जाएगी। वहीं, बिहार पुलिस के आधिकारिक एक्स अकाउंट से मामले की जांच का आश्वासन देने वाला एक ट्वीट पोस्ट किया गया था, जिसे बाद में हटा दिया गया। इस हरकत ने विवाद को और हवा दे दी है।

सरकार ने वापस लिए हैं केस यह विवाद तब सामने आया है जब बिहार सरकार ने NEET पेपर लीक आंदोलन से जुड़े सभी केस वापस लेने की घोषणा की है। सरकार ने 26 जुलाई तक दर्ज सभी एफआईआर और नोटिस को रद्द करने का फैसला लिया था। इस आंदोलन के दौरान कुल 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें बड़ी संख्या में नाबालिग भी शामिल थे।

जांच की दरकार अब सवाल यह उठता है कि यदि सदाकत वास्तव में रूस में था, तो उसका नाम पुलिस की सूची में कैसे दर्ज हुआ? क्या यह पुलिस की बड़ी चूक है या कोई साजिश? फिलहाल, इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग तेज हो गई है, क्योंकि एक निर्दोष का नाम एफआईआर में जुड़ना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा प्रश्नचिह्न लगाता है।

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