लोकसभा में मंगलवार को पेपर लीक संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर का भाषण चर्चा का विषय बन गया। रात 10:40 बजे मिले महज 9 मिनट के समय में थरूर ने न केवल सरकार के बिल की खामियों को उजागर किया, बल्कि सिस्टम को ठीक करने का एक ठोस फॉर्मूला भी पेश किया।
घंटी और माइक के बीच संघर्ष भाषण के दौरान सदन में समय सीमा का दबाव साफ दिखा। अपनी बात रखते हुए थरूर ने सोशल मीडिया पर बताया कि चेयर की ओर से लगातार घंटी बजती रही और अंत में उनका माइक भी बंद कर दिया गया। इसके बावजूद उन्होंने सिस्टम की गहरी खामियों पर प्रहार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
सजा से ज्यादा रोकथाम पर जोर थरूर ने कहा, यह बिल दोषियों के लिए सजा तो बढ़ाता है, लेकिन हमारा ध्यान अपराध होने के बाद दंड देने पर है, न कि अपराध को रोकने पर। उन्होंने तर्क दिया कि पेपर लीक कोई अलग-थलग घटना नहीं है, बल्कि यह हमारी परीक्षा प्रणाली में मौजूद गहरी स्ट्रक्चरल खामियों का नतीजा है।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट की हकीकत बिल में 2 महीने में जांच और 3 महीने में ट्रायल पूरा करने का प्रस्ताव है। इस पर सवाल उठाते हुए थरूर ने न्यायिक प्रणाली की क्षमता पर तंज कसा। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि पहले से मौजूद फास्ट-ट्रैक कोर्ट भारी बोझ तले दबे हैं, जहां 2.5 लाख से अधिक मामले लंबित हैं। उन्होंने साफ कहा कि जजों और प्रॉसिक्यूटर की संख्या बढ़ाए बिना सिर्फ कानून पास करने से त्वरित न्याय नहीं मिलेगा।
सिस्टम के सुधार की मांग मीडिया से बात करते हुए थरूर ने दो टूक कहा, सवाल यह नहीं है कि किस पार्टी के शासन में ज्यादा पेपर लीक हुए। सवाल यह है कि सिस्टम टूटा हुआ है और इसे कैसे ठीक किया जाए? उन्होंने सरकार से अपील की कि वे ऐसे तंत्र का निर्माण करें जहां पेपर लीक की गुंजाइश ही न बचे, ताकि युवाओं के सपनों का सौदा होने से रोका जा सके।
क्या है प्रस्तावित बिल? सरकार द्वारा पेश पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026 में संगठित पेपर लीक के लिए 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। अब सबकी नजरें बुधवार को होने वाली चर्चा पर हैं, जिसमें नेता विपक्ष राहुल गांधी अपनी बात रखेंगे और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह सरकार का पक्ष रखेंगे।
I finally got to speak in the LokSabha on the Paper Leaks Amendment Bill at 10:40 pm. I dramatically abbreviated my arguments for lack of time, but made a few crucial points in the nine minutes I was given, punctuated by the Chair ringing the bell repeatedly and even switching… pic.twitter.com/1hUHKBXjin
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) July 28, 2026
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