मणिका राणा के निष्कासन का सच: क्या NEET विरोध में शामिल होने पर गई भाजपा नेता की कुर्सी?
News Image

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान उत्तराखंड की भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) की पूर्व अध्यक्ष मणिका राणा की उपस्थिति ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी थी। सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि प्रदर्शन में शामिल होने के चलते भाजपा ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। अब मणिका राणा ने खुद सामने आकर इन दावों की सच्चाई बयां की है।

क्या है निष्कासन की सच्चाई?

मणिका राणा ने स्पष्ट किया है कि उन्हें निष्कासित किए जाने की खबरें पूरी तरह भ्रामक और फर्जी हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें उनके पद से अप्रैल या मई महीने में ही मुक्त कर दिया गया था। मणिका के अनुसार, यह निर्णय संगठन के संगठनात्मक फेरबदल का हिस्सा था, न कि जंतर-मंतर प्रदर्शन का परिणाम। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे अभी भी भाजपा का सक्रिय हिस्सा हैं।

पद छोड़ने की असली वजह

अपने पद से हटने के कारणों पर बात करते हुए मणिका ने बताया कि वे अपनी उच्च शिक्षा और निजी व्यस्तताओं के चलते संगठनात्मक जिम्मेदारियों को पूरा समय नहीं दे पा रही थीं। उन्होंने साफ किया कि NEET पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों के समर्थन में शामिल होना उनका व्यक्तिगत निर्णय था और इस प्रदर्शन का उनके पद छोड़ने से कोई लेना-देना नहीं है। उनकी मांगें छात्रों के हितों से जुड़ी थीं, जिन्हें पूरा होते देख उन्हें संतुष्टि है।

कौन हैं मणिका राणा?

उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल की रहने वाली मणिका राणा छात्र राजनीति का एक उभरता हुआ चेहरा हैं। मात्र 19-20 वर्ष की आयु में उन्होंने अपनी पहचान एक प्रखर युवा नेता के रूप में बनाई है। उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से हुई थी, जहां उन्होंने 2022 में प्रदेश स्तर पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। इसके बाद वे BJYM में शामिल हुईं और नई टिहरी में मंडल अध्यक्ष के रूप में पार्टी को मजबूती प्रदान की।

विवादों में रहा NEET प्रदर्शन

मणिका राणा जिस प्रदर्शन का हिस्सा बनीं, वह कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित किया गया था। नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जून से शुरू हुआ यह आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय तक चला। सोनम वांगचुक जैसे एक्टिविस्टों के जुड़ने और संसद चलो मार्च के बाद इस आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया, जिसके परिणामस्वरूप शिक्षा मंत्री को अपना पद छोड़ना पड़ा।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

चलती ट्रेन के AC कोच में जलती आग! यात्री की बड़ी लापरवाही का वीडियो वायरल, रेलवे ने शुरू की जांच

Story 1

कलवा को मिला 50 करोड़ का अंतरराष्ट्रीय खेल सौगात, पर भूमिपूजन ने बढ़ाई सियासत की गरमाहट

Story 1

छात्रों की कानूनी लड़ाई के लिए कपिल सिब्बल का बड़ा ऐलान: CJP फंड में देंगे ₹1 करोड़

Story 1

तेलुगु सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री पावला श्यामला का निधन, अभावों में बीता जीवन का अंतिम दौर

Story 1

नीट पेपर लीक: Gen-Z प्रदर्शनकारियों की ढाल बनीं गुरमेहर कौर, कांग्रेस की नई कानूनी मुहिम

Story 1

बांकीपुर उपचुनाव में घमासान: प्रशांत किशोर ने BJP के नीतीश वीडियो को बताया AI का खेल, दी इस्तीफे की चुनौती

Story 1

एनडीए का मंगल मिलन : पेपर लीक कानून पर पीएम मोदी का गुरु मंत्र , ममता के 20 बागी सांसदों ने भरी हुंकार

Story 1

बिहार में फिर लौटेगा मानसून का जोर: 30 जुलाई से झमाझम बारिश के आसार, जानें आपके जिले का हाल

Story 1

अमरनाथ यात्रा से लौट रही बस पलटी: गांदरबल में 39 श्रद्धालु सवार थे, रेस्क्यू से बची जान

Story 1

श्रीलंका दौरे पर टीम इंडिया का मिशन टेस्ट शुरू: सीरीज से पहले होगा कड़ा अभ्यास, जानें पूरा शेड्यूल