विराम है, अंत नहीं: CJP का प्लान-B तैयार, शिक्षा व्यवस्था को बदलने के लिए शुरू हुआ नया मिशन
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36 दिनों तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर चले ऐतिहासिक छात्र आंदोलन के बाद, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भले ही अपना तंबू उखाड़ लिया हो, लेकिन संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि यह महज एक पड़ाव है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से संतुष्ट होने के बजाय, CJP अब देश की पूरी शिक्षा और शासन प्रणाली में बुनियादी बदलाव की तैयारी में जुट गई है।

प्लान-B और आगे की रणनीति

संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि आंदोलन समाप्त होने के बाद अब संगठन अपनी अगली कार्ययोजना पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, यह आंदोलन का विराम है, अंत नहीं। हमें नई रणनीति तैयार करने के लिए थोड़ा समय चाहिए, हम जल्द ही अपने प्लान-B का खुलासा करेंगे। दीपके ने पंजाब में सामने आए कथित पेपर लीक मामले को भी CJP की अगली प्राथमिकता बताया है।

छात्रों के मुकदमों और सुरक्षा पर नजर

CJP सरकार के साथ लगातार बातचीत कर रही है ताकि आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए छात्रों पर दर्ज मुकदमे बिना शर्त वापस लिए जाएं। अभिजीत दीपके का कहना है कि प्रदर्शनकारी युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना उनकी जिम्मेदारी है। इसके साथ ही, संगठन ने दिल्ली में हुए चलो संसद मार्च के दौरान पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग की निंदा की है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ पारदर्शी कार्रवाई की मांग की है।

पीड़ितों को न्याय और 1 करोड़ का मुआवजा

नीट (NEET) विवाद के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को न्याय दिलाना CJP का प्रमुख एजेंडा बना हुआ है। संगठन सरकार से प्रत्येक पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग कर रहा है। सरकार ने इसके लिए सैद्धांतिक सहमति तो जताई है, लेकिन CJP इस पर ठोस और त्वरित कार्रवाई के लिए दबाव बनाए हुए है।

क्या चुनावी राजनीति में उतरेगी CJP?

संगठन के प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि CJP का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं की समस्याओं को राष्ट्रीय पटल पर मजबूती से रखना है। जब उनसे पूछा गया कि क्या यह आंदोलन आगे चलकर एक राजनीतिक दल बनेगा, तो उन्होंने फिलहाल इसे खारिज किया। हालांकि, संगठन के प्रमुख चेहरे आशुतोष रांका ने गुत्थी सुलझाते हुए कहा, राजनीति में कभी भी ना नहीं कहना चाहिए।

फिलहाल, CJP का लक्ष्य एक सशक्त दबाव समूह बनाना है, ताकि भविष्य में सत्ता चाहे किसी की भी हो, उसे युवाओं की मांगों के आगे झुकना ही पड़े। रांका ने कहा, जब तक शिक्षा व्यवस्था में ठोस सुधार नहीं होता, CJP का एक भी सिपाही शांत नहीं बैठेगा।

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