बस स्टैंड पर रोती 80 साल की मां, बेटे की ऐसी करतूत कि कांप उठेगी रूह!
News Image

एक मां जीवन भर अपने बच्चों को संवारने में अपनी पूरी ऊर्जा खपा देती है। लेकिन जब उम्र के आखिरी पड़ाव पर उसे सबसे ज्यादा अपनों की जरूरत होती है, तब उसे घर से निकाल देना न केवल दिल तोड़ने वाली घटना है, बल्कि यह हमारे समाज की गिरती संवेदनाओं का कड़वा सच भी है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो वायरल हो रहा है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है।

बस स्टैंड पर बेसहारा छोड़ गई ममता वायरल वीडियो में लगभग 80 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला बस स्टैंड पर अकेली बैठी दिखाई दे रही है। आंखों में आंसू और चेहरे पर लाचारी लिए बुजुर्ग महिला के पास न रहने की जगह है और न ही कोई सहारा। आरोप है कि बहू के साथ हुए किसी मामूली विवाद के चलते बेटे ने अपनी ममतामयी मां को घर से बाहर का रास्ता दिखा दिया। वह उन्हें सड़क पर लाकर छोड़ गया और खुद अपनी दुनिया में लौट गया।

वीडियो में छलका मां का दर्द अपनी आपबीती सुनाते हुए बुजुर्ग महिला वीडियो में बेहद भावुक नजर आ रही है। वह उन हाथों के बारे में बात कर रही है, जिन्हें पाल-पोसकर उन्होंने बड़ा किया था, उन्हीं हाथों ने आज उन्हें बेघर कर दिया। महिला की आवाज में दर्द और आंखों की नमी इस बात का सबूत है कि एक मां के लिए घर से ज्यादा अपने बच्चे का तिरस्कार उसे अंदर तक तोड़ देता है।

सालों पुराना दर्द, आज बना चर्चा का विषय मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना करीब दो महीने पुरानी है, लेकिन इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। वीडियो सामने आते ही इंटरनेट पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। यूजर्स का कहना है कि जिस मां ने उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उसे बुढ़ापे में सड़क पर धकेलना घोर अपराध और अमानवीय है। कई लोग बेटे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

कानून भी देता है सुरक्षा, पर नैतिकता का क्या? भारत में माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 मौजूद है, जो बच्चों को अपने माता-पिता की देखभाल के लिए बाध्य करता है। कानूनन इसे अपराध माना गया है और दोषी संतान के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या पुलिस रिपोर्ट सामने नहीं आई है, फिर भी यह घटना सामाजिक पतन की ओर इशारा करती है।

क्या मरती जा रही है रिश्तों की गर्माहट? यह वीडियो सिर्फ एक बुजुर्ग की दास्तां नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर चेतावनी है। एकल परिवारों की बढ़ती संख्या और बदलती जीवनशैली के बीच बुजुर्ग आज अपने ही घरों में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यह घटना समाज के हर व्यक्ति से एक ही सवाल पूछ रही है—क्या हम इतने संवेदनहीन हो गए हैं कि जीवन की शाम में अपने माता-पिता को सहारा देने के बजाय बोझ समझने लगे हैं?

फिलहाल, इस मामले में प्रशासनिक जांच और सच्चाई के सामने आने का इंतजार है। यदि आरोप सही हैं, तो यह न केवल कानूनी बल्कि नैतिक रूप से भी एक माफी न देने योग्य कृत्य है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

अमाल मलिक का तनिष्क बागची पर फिर हमला: पोस्ट डिलीट करके भी दी सीधी चेतावनी, कहा- औकात में रहना

Story 1

14 साल बाद घोस्ट राइडर से निकोलस केज की छुट्टी, रायन गॉसलिंग की दमदार एंट्री

Story 1

भारत का पहला T20 कप्तान कौन था? जानिए रोहित, धोनी और सूर्या में से किसका रिकॉर्ड है सबसे शानदार

Story 1

बिहार: NEET विरोध में दहला सीवान, पुलिस फायरिंग पर तेजस्वी का बड़ा आरोप- चलाईं AK-47

Story 1

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: आज सुपर संडे में भारत का दम, मीराबाई चानू समेत 5 गोल्ड मेडल पर नजर

Story 1

अब पैसों के लिए नहीं रुकेगी किसी गरीब की सर्जरी: नागपुर महा आरोग्य शिविर में मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान

Story 1

अनाहत सिंह का ऐतिहासिक धमाका: वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश जीतकर पीएम मोदी ने की जमकर तारीफ

Story 1

कानपुर: बीच सड़क पर महिला का हाईवोल्टेज ड्रामा , होमगार्ड को जमकर पीटा, वर्दी खींची

Story 1

15 साल के वैभव सूर्यवंशी को बाहरी शोर से रहने की सलाह, ईशान किशन ने खोला बड़ा राज

Story 1

ग्रेटर नोएडा: 15 फीट गहरे मौत के गड्ढे में गिरा मासूम, ठेकेदार गिरफ्तार