क्या अमेरिका ने जानबूझकर तोड़ा ईरान के साथ सीजफायर? पूर्व इजरायली वार्ताकार के खुलासे से मची खलबली
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अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुए सीजफायर समझौते (MoU) पर संकट के बादल घिरे हैं। दोनों देश एक-दूसरे पर समझौते की शर्तों को तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं। अब इजरायल के पूर्व वार्ताकार डेनियल लेवी के बयानों ने इस विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है।

टूटने की कगार पर समझौता

जून में हस्ताक्षरित यह अंतरिम समझौता अब लगभग निष्प्रभावी होता दिख रहा है। तेहरान का आरोप है कि वाशिंगटन ने सैन्य कार्रवाई जारी रखकर और प्रतिबंध लगाकर समझौते का उल्लंघन किया है। वहीं, अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमले ईरान की ओर से समझौते का पहला उल्लंघन थे।

विवाद का केंद्र: होर्मुज जलडमरूमध्य

दोनों देशों के बीच होर्मुज संकट ने समझौते की नींव हिला दी है। समझौते में सुरक्षित समुद्री मार्ग और हस्तक्षेप न करने की बात कही गई थी। हालांकि, व्यावसायिक जहाजों पर लगातार हमलों ने इस दावे को खत्म कर दिया कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर भरोसा कर सकते हैं। अब दोनों सरकारें इस विफलता का ठीकरा एक-दूसरे पर फोड़ रही हैं।

डेनियल लेवी ने खोले अमेरिका के धागे

इजरायल के पूर्व वार्ताकार डेनियल लेवी ने एक साक्षात्कार में चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि अमेरिका समझौते की शर्तों को मानने के लिए गंभीर था। वे ईरान पर अपनी शर्तें थोपना चाहते थे, लेकिन वहां शक्ति संतुलन अलग है।

लेवी के अनुसार, अमेरिका ने समझौते के अनुच्छेद-5 का उल्लंघन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वाशिंगटन ने अपनी मर्जी से जहाजों के लिए अलग मार्ग का दबाव बनाया, जिसका जिक्र समझौते में कहीं नहीं था।

अमेरिकी नीतियों में विरोधाभास

लेवी ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान की संपत्तियों को अनफ्रीज न करना और लेबनान के संदर्भ में अमेरिकी रुख, सीधे तौर पर समझौते के कई अनुच्छेदों का उल्लंघन है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई में हो रही इस प्रक्रिया का खुद अमेरिकी तंत्र के भीतर विरोध हुआ, जिसके कारण ईरान पर दबाव बनाने की पुरानी नीति फिर से लागू कर दी गई।

लेवी की माने तो इन घटनाओं ने ईरान को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि वाशिंगटन कभी भी समझौते को लेकर ईमानदार नहीं था। इस अविश्वास ने तनाव के एक नए और खतरनाक चक्र को जन्म दिया है।

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