हमारी पुलिस दिल्ली जैसी नहीं है : राज ठाकरे ने शिवाजी पार्क से भरी हुंकार, पुलिस की कार्यशैली पर की बड़ी टिप्पणी
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मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में आज एक अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने अभिनंदन मोर्चे के दौरान छात्र शक्ति की सराहना की, लेकिन उनके संबोधन का सबसे चर्चित हिस्सा महाराष्ट्र पुलिस की कार्यकुशलता और दिल्ली पुलिस के साथ उसकी तुलना रहा।

महाराष्ट्र और दिल्ली पुलिस में बड़ा अंतर

मंच से दहाड़ते हुए राज ठाकरे ने स्पष्ट शब्दों में कहा, मैं मुंबई पुलिस के सभी जवानों का आभार मानता हूं। उन्होंने जिस तरह से इस विशाल जनसैलाब और छात्रों के आंदोलन को संभाला, वह अत्यंत प्रशंसनीय है।

इसी के साथ उन्होंने दिल्ली पुलिस पर निशाना साधते हुए कहा, यही महाराष्ट्र और दिल्ली की पुलिस के बीच का सबसे बड़ा फर्क है। हमारी पुलिस कैसी है और दिल्ली की पुलिस कैसी है, यह अब पूरी दुनिया के सामने स्पष्ट हो चुका है। उनके इस बयान को दिल्ली में छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई के संदर्भ में जोड़कर देखा जा रहा है।

Gen-Z ने सरकार को दिखाया आईना

राज ठाकरे ने नई पीढ़ी यानी Gen-Z की ताकत को सलाम किया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन युवाओं की एकजुटता की जीत है। ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा, इस देश की Gen-Z पीढ़ी सरकार के बाल कैसे नोचती है, यह इस आंदोलन ने दिखा दिया है। यह जीत उन छात्रों की है जिन्होंने पूरे देश में मशाल जलाई और सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया।

21 छात्रों को दी श्रद्धांजलि

जीत के जश्न के बीच राज ठाकरे का संवेदनशील चेहरा भी दिखा। उन्होंने नीट पेपर लीक विवाद के कारण जान गंवाने वाले 21 छात्रों को याद किया। राजस्थान के प्रदीप मेघवाल जैसे छात्रों का नाम लेते हुए उन्होंने कहा, हम सफलता का जश्न मना रहे हैं, लेकिन उन छात्रों को नहीं भूल सकते जिन्होंने दबाव में आकर अपनी जान गंवाई। उनके आह्वान पर पूरे शिवाजी पार्क में हजारों लोगों ने एक मिनट का मौन रखकर दिवंगत छात्रों को श्रद्धांजलि दी।

प्रशासनिक गौरव और नई बहस

राज ठाकरे का पूरा संबोधन गर्व और प्रशंसा से भरा रहा। उन्होंने न केवल छात्रों के संघर्ष को नई परिभाषा दी, बल्कि मुंबई पुलिस की पीठ थपथपाकर स्थानीय प्रशासन की कार्यक्षमता का भी मान बढ़ाया। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या आंदोलनों के दौरान सुरक्षा बलों का मानवीय व्यवहार ही लोकतंत्र की असली मजबूती है।

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