कैस्पियन सागर में यूक्रेन का सर्जिकल स्ट्राइक , ईरान ने दी जंग और भड़कने की चेतावनी
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रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब अपनी सीमाओं को लांघ चुका है। यूक्रेन ने पहली बार कैस्पियन सागर में एक ईरानी जहाज को निशाना बनाकर संघर्ष को एक खतरनाक मोड़ पर खड़ा कर दिया है। यह जहाज कथित तौर पर रूस के लिए सैन्य हथियार और रसद लेकर जा रहा था।

इस हमले ने तेहरान और कीव के बीच कूटनीतिक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना को रूस की आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई लाइन) पर एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है।

तेहरान का कड़ा रुख: भुगतने होंगे गंभीर नतीजे ईरानी विदेश मंत्रालय ने इस हमले को खुली आक्रामकता करार दिया है। तेहरान ने यूक्रेन के वरिष्ठ राजनयिक को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ईरान का कहना है कि यह दुस्साहस क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ाएगा।

ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस हमले के लिए न केवल यूक्रेन, बल्कि उसे उकसाने वाले समर्थक देश भी जिम्मेदार होंगे। हालांकि, जहाज को हुए नुकसान की विस्तृत जानकारी अभी साझा नहीं की गई है।

कीव और स्लोवियांस्क पर रूस की मिसाइलें समुद्र में हुई इस कार्रवाई के जवाब में रूस ने यूक्रेन के रिहायशी इलाकों पर हमलों की झड़ी लगा दी है। शनिवार रात कीव पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया, जिसमें नागरिक इमारतों को निशाना बनाया गया।

इससे पहले शुक्रवार को हुए भीषण हमले में 10 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। वहीं, स्लोवियांस्क शहर में रूसी ग्लाइड बमों की मार से 5 मासूमों की जान चली गई। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने आगाह किया है कि आने वाले दिनों में रूस राजधानी पर और बड़े हमले कर सकता है।

30 हजार उत्तर कोरियाई सैनिकों की आहट युद्ध के मैदान में रूस को हो रहे भारी नुकसान के बीच राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एक नया दावा किया है। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस अपनी सेना की कमी को पूरा करने के लिए 30,000 उत्तर कोरियाई सैनिकों को यूक्रेन के खिलाफ तैनात करने की तैयारी कर रहा है।

माना जा रहा है कि पुतिन अब रूस के भीतर नए सिरे से सैन्य लामबंदी की जमीन तैयार कर रहे हैं, क्योंकि युद्ध में रूसी सैनिकों की मौत की संख्या उनकी नई भर्ती क्षमता से कहीं ज्यादा हो गई है।

बढ़ता वैश्विक खतरा कैस्पियन सागर अब तक सीधे युद्ध क्षेत्र से दूर था, लेकिन यूक्रेन की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि वह रूस की रसद लाइनों को कहीं भी निशाना बनाने की क्षमता रखता है।

तेहरान और मॉस्को के बीच गहराती सैन्य जुगलबंदी अब पश्चिम और नाटो देशों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष इसी तरह फैलता रहा, तो आने वाले समय में विश्व का एक बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ सकता है।

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