अरामको पर हूतियों का अग्नि-प्रहार : सऊदी की आर्थिक धमनियों पर वार से सहमा ग्लोबल मार्केट
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अब सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच एक नया और खूंखार युद्ध छिड़ गया है। हूतियों ने सऊदी की आर्थिक रीढ़ मानी जाने वाली सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको को सीधी मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बनाया है। इस हमले के बाद पूरे मध्य-पूर्व में खलबली मच गई है।

हमले की वजह: होदेइदा का बदला यह ताजा हमला यमन के बंदरगाह शहर होदेइदा पर सऊदी गठबंधन द्वारा की गई एयरस्ट्राइक का सीधा जवाब है। हूती अधिकारियों का आरोप है कि सऊदी फाइटर जेट्स ने उनके टेलीकॉम दफ्तर और पोर्ट को नष्ट किया। इस कार्रवाई से बौखलाए हूतियों ने बदले में सऊदी के रेड सी वाले शहरों, यानबू और जीज़ान स्थित अरामको के तेल ठिकानों को धू-धू कर जला दिया।

सायरन से गूंजा सऊदी, प्रशासन की चुप्पी हमले के तुरंत बाद जीजान और यानबू की सड़कें सायरन की आवाजों से गूंज उठीं। हूती सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। सऊदी प्रशासन ने इमरजेंसी अलर्ट जारी होने की बात तो स्वीकार की है, लेकिन अरामको को हुए वास्तविक नुकसान पर अभी तक कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है, जिससे अटकलें और तेज हो गई हैं।

लाल सागर पर मंडराया बड़ा संकट हूतियों ने सिर्फ अरामको को ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग बाब अल-मंडेब पर भी कब्जा करने की धमकी दी है। यह वह जलडमरूमध्य है जहां से दुनिया का लगभग 12 प्रतिशत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार गुजरता है। हूतियों ने ऐलान किया है कि वे सऊदी से जुड़े हर कमर्शियल जहाज को इस रास्ते से गुजरने नहीं देंगे।

भारत समेत पूरी दुनिया की जेब पर पड़ेगा असर सऊदी अरामको दुनिया की सबसे बड़ी तेल निर्यातक कंपनी है। यदि इन हमलों के कारण तेल उत्पादन में बाधा आती है या समुद्री रास्ता बाधित होता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन ध्वस्त हो सकती है। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ेगा, जहां ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं।

वर्तमान में मिडिल ईस्ट एक साथ कई मोर्चों पर जल रहा है। हूती-सऊदी की यह नई जंग अगर जल्द नहीं थमी, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह एक बड़ा आर्थिक संकट साबित हो सकती है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें रेड सी की हलचल और तेल की कीमतों पर टिकी हैं।

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