पेपर लीक पर ट्रैक बदली सरकार: फास्ट ट्रैक कोर्ट का एलान, फिर भी क्यों सुलझ नहीं रहा आंदोलन का पेच?
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देश भर में पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। आंदोलनों के बीच सरकार की ओर से बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का एलान किया है। इसके बावजूद, सड़क से संसद तक टकराव की स्थिति बरकरार है।

पीएम का एक्शन प्लान: दोषियों को अब मिलेगी त्वरित सजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का मुख्य उद्देश्य पेपर लीक जैसे गंभीर अपराधों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड दिलाना है। कानून मंत्रालय ने भी इस दिशा में सक्रियता दिखाते हुए दिल्ली, नागपुर, कोलकाता और जबलपुर जैसे शहरों में जहां एफआईआर दर्ज हैं, फास्ट ट्रैक कोर्ट सक्रिय करने की तैयारी शुरू कर दी है।

फास्ट ट्रैक कोर्ट क्यों है जरूरी? भारतीय न्याय व्यवस्था में लंबित केसों की लंबी फेहरिस्त के बीच फास्ट ट्रैक कोर्ट उम्मीद की किरण हैं। सामान्य अदालतों में जहां एक केस के निपटारे में सालों लगते हैं, वहीं फास्ट ट्रैक कोर्ट में प्रतिदिन सुनवाई होती है। आंकड़ों के अनुसार, इन विशेष अदालतों में केस निपटारे की दर लगभग 96% है। अब पेपर लीक के आरोपी भी सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2024 के तहत इन्हीं अदालतों में कटघरे में खड़े होंगे, जहाँ 10 साल तक की कैद और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

राजनीतिक अखाड़ा बना छात्र आंदोलन एक ओर सरकार समाधान की बात कर रही है, तो दूसरी ओर आंदोलन का स्वरूप बदलता दिख रहा है। राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष का प्रतिनिधिमंडल छात्रों के समर्थन में गांधी स्मृति पहुंचा, तो वहीं महबूबा मुफ्ती जैसे नेताओं का जुड़ना इसे राजनीतिक रंग दे रहा है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के कारण दिल्ली के कनॉट प्लेस इलाके में जनजीवन प्रभावित हुआ और सुरक्षा कारणों से दुकानों को जल्दी बंद करना पड़ा।

सवाल अब भी बरकरार: क्या निकलेगा समाधान? सवाल यह है कि सरकार की इस बड़ी घोषणा के बाद भी आंदोलन क्यों थमता नहीं दिख रहा है? विपक्ष अपनी पुरानी मांगों पर अड़ा है, जबकि सरकार इसे युवाओं के हित में उठाया गया निर्णायक कदम मान रही है। इस टकराव में सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं छात्रों के वैध संघर्ष का लाभ उठाकर नकाबपोश तत्व व्यवस्था और शांति को नुकसान न पहुंचाएं।

फिलहाल, न तो विपक्ष पीछे हटने को तैयार है और न ही सरकार ने अपनी रणनीति में कोई बदलाव किया है। ऐसे में यह आंदोलन आने वाले दिनों में और कितना फैलेगा और आम नागरिकों की मुश्किलें कितनी बढ़ेंगी, यह देखना बाकी है।

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