दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए CJP के चलो संसद मार्च के दौरान पुलिस की बर्बरता का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है। इस वीडियो में एडिशनल डीसीपी (ADCP) संदीप लांबा एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते हुए नजर आ रहे हैं। इस घटना के बाद से पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठ रहे हैं।
ADCP संदीप लांबा पर एक्शन वीडियो के वायरल होते ही बवाल मच गया। व्यापक आलोचना के बाद, प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से संदीप लांबा को जंतर-मंतर पर उनकी ड्यूटी से हटा दिया है। उन्हें वापस उनके मूल जिले (नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली) में भेज दिया गया है। लोगों का कहना है कि उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों से ऐसी हिंसा की उम्मीद नहीं की जाती और यह शक्ति का दुरुपयोग है।
दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामला यह विवाद अब अदालत की दहलीज तक पहुंच चुका है। बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इस मामले को जोर-शोर से उठाया। अदालत के समक्ष दलील दी गई कि महिला शांति से खड़ी थी, फिर भी उसे बिना किसी उकसावे के मारा गया।
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही, घटना से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
कौन हैं संदीप लांबा? संदीप लांबा 2011 बैच के DANIPS (दिल्ली, अंडमान और निकोबार आइलैंड्स पुलिस सर्विस) अधिकारी हैं। वे वर्तमान में दिल्ली पुलिस में नॉर्थ-ईस्ट जिले के एडिशनल डीसीपी के पद पर तैनात हैं। 20 जुलाई को उन्हें CJP मार्च के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसके दौरान यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी।
सिक्के का दूसरा पहलू: पुलिस पर भी हुआ हमला प्रदर्शन के दौरान केवल पुलिस ही नहीं, प्रदर्शनकारियों पर भी आरोप लग रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने टॉलस्टॉय मार्ग पर तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों पर हमले के मामले में भी एफआईआर दर्ज की है। पुलिस द्वारा जारी किए गए 35 सेकंड के फुटेज में कुछ प्रदर्शनकारी जवानों पर हमला करते दिख रहे हैं, जिसमें एक जवान बुरी तरह घायल हुआ है।
अब हाईकोर्ट की निगरानी में इस पूरे घटनाक्रम की जांच की उम्मीद है। याचिकाकर्ताओं ने इस मामले में स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) से निष्पक्ष जांच और न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है।
सत्ता का ऐसा दुरुपयोग और निरंकुशता बिल्कुल अस्वीकार्य है।
— UMMATI (@1_ummati_1) July 21, 2026
अतिरिक्त डीसीपी संदीप लांबा को एक महिला प्रदर्शनकारी पर हाथ उठाने के लिए तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए।
उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों से अधिक जवाबदेही और उच्च मानकों की अपेक्षा की जाती है, उन्हें बिल्कुल दंडमुक्ति नहीं…
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