भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पास होने के बाद सियासी गलियारों में बहस तेज हो गई है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मुसलमान शरीयत के खिलाफ किसी भी कानून को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं।
एक ही व्यक्ति द्वारा ड्राफ्टिंग पर सवाल मौलाना शहाबुद्दीन ने UCC के ड्राफ्टिंग प्रोसेस पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि उत्तराखंड, गुजरात, असम और अब मध्य प्रदेश में एक ही जस्टिस रंजना देसाई को ड्राफ्ट तैयार करने की जिम्मेदारी क्यों दी गई? उन्होंने इसे लेकर प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह जताया है।
आदिवासियों को अलग रखने पर घेरा मौलाना ने UCC के प्रावधानों में आदिवासियों और अनुसूचित जाति/जनजाति को छूट देने पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, क्या ये भारत के नागरिक नहीं हैं? यदि यह कानून देश के लिए है, तो इन्हें इससे अलग क्यों रखा गया? क्या सिर्फ मुसलमानों को ही निशाना बनाया जा रहा है?
संविधान की अनदेखी का आरोप मौलाना ने आरोप लगाया कि UCC कानून बनाने से पहले विभिन्न समुदायों और संप्रदायों से कोई मशविरा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, ऐसे कानून के लिए सभी पक्षों की राय ली जानी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने केवल अपने समर्थकों की सलाह पर इसे विधानसभा में पास करा लिया।
शरीयत में सीधा दखल मौलाना शहाबुद्दीन ने दोटूक शब्दों में कहा कि UCC पूरी तरह से शरीयत में हस्तक्षेप है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय मुसलमान अपने देश से प्रेम करते हैं और कानून का पालन करते हैं, लेकिन अगर कोई कानून सीधे तौर पर उनकी धार्मिक मान्यताओं (शरीयत) के खिलाफ थोपा जाएगा, तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सरकार का पक्ष: समानता और न्याय दूसरी ओर, मध्य प्रदेश सरकार इस बिल को एक ऐतिहासिक कदम मान रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि UCC के लागू होने से प्रदेश में सामाजिक समानता और महिलाओं को बराबरी का हक मिलेगा। सरकार का तर्क है कि विवाह, संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में यह कानून महिलाओं को मजबूती प्रदान करेगा।
*Bareily, Uttar Pradesh: On the Uniform Civil Code(UCC), Maulana Sahabuddin says, In Madhya Pradesh, the Uniform Civil Code (UCC) has been approved by the Assembly and sent to the Governor for assent. While it is expected to be approved and implemented. But why only one woman,… pic.twitter.com/WY9UHYRPKp
— IANS (@ians_india) July 22, 2026
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