संसद के भीतर इंडी गठबंधन में दरार? पेपर लीक पर अखिलेश और वेणुगोपाल के बीच तीखी नोकझोंक
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नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र का तीसरा दिन हंगामेदार रहा। पेपर लीक और छात्रों पर लाठीचार्ज के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने थे, लेकिन इस राजनीतिक खींचतान के बीच विपक्षी खेमे के भीतर ही दो बड़े नेताओं—अखिलेश यादव और केसी वेणुगोपाल—के बीच तीखी बहस ने सबको चौंका दिया।

चर्चा के लिए सरकार तैयार, विपक्ष की शर्त पर अटकी बात

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने स्पष्ट किया कि सरकार पेपर लीक और लाठीचार्ज के मुद्दे पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विपक्ष को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में समय तय करने का सुझाव दिया। हालांकि, कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने साफ कर दिया कि चर्चा तभी शुरू होगी जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देंगे।

अखिलेश यादव क्यों हुए नाराज?

सदन में जब केसी वेणुगोपाल अपनी बात रख रहे थे, उसी समय समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी बोलने के लिए खड़े हुए, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। अखिलेश का तर्क था कि यह मुद्दा किसी एक दल का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं का है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्रों की बात नहीं सुनी गई, तो वे सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।

वेणुगोपाल से भिड़े अखिलेश, फ्लोर मैनेजमेंट पर उठाए सवाल

सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद संसद परिसर में अखिलेश यादव और केसी वेणुगोपाल के बीच माहौल गर्म हो गया। सूत्रों के अनुसार, अखिलेश ने वेणुगोपाल से तीखे सवाल किए। उनका मुख्य विरोध इस बात को लेकर था कि विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते कांग्रेस ने चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी को बोलने का मौका क्यों नहीं दिया और न ही उनका समर्थन किया।

इस दौरान दोनों नेताओं के बीच काफी आक्रामक बातचीत हुई। परिस्थिति को बिगड़ता देख अन्य कांग्रेसी नेताओं को बीच-बचाव करना पड़ा।

सब ठीक है , फिर भी नाराजगी बरकरार

बाद में मीडिया से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सब कुछ ठीक है, लेकिन फ्लोर मैनेजमेंट में स्पष्ट रूप से कमी रही। उन्होंने दोहराया कि यह मामला छात्रों के भविष्य से जुड़ा है और वे अपनी बात पर अडिग हैं कि शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।

क्या सियासी श्रेय लेने की होड़ है?

इस घटना ने विपक्षी एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक तरफ पेपर लीक का मुद्दा सरकार के खिलाफ एक बड़ा हथियार बना हुआ है, वहीं विपक्ष के भीतर का यह आपसी मतभेद संकेत देता है कि गठबंधन में तालमेल की भारी कमी है। अब देखना यह होगा कि क्या विपक्ष एकजुट होकर सरकार को घेरेगा या फिर श्रेय की राजनीति इस बड़े मुद्दे पर भारी पड़ेगी।

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