राहुल गांधी के एक फोन पर दिल्ली की सड़कों पर उतरे अखिलेश: क्या 2027 के लिए युवा कार्ड तैयार?
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दिल्ली का लुटियंस जोन मंगलवार को एक ऐसी तस्वीर का गवाह बना, जिसने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के समीकरणों को लेकर हलचल तेज कर दी है। नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में धांधली के खिलाफ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रधानमंत्री आवास (7 लोक कल्याण मार्ग) के बाहर धरने पर बैठे। इस विरोध प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का अचानक पहुँचना सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है।

अखिलेश का खुलासा: फोन कॉल और तुरंत एक्शन बुधवार को खुद अखिलेश यादव ने इस ऑपरेशन विरोध के पीछे की कहानी साफ की। उन्होंने बताया कि वे दिल्ली में ही थे, तभी राहुल गांधी का फोन आया। राहुल ने स्पष्ट कहा कि देश का युवा सड़क पर पिट रहा है और नीट जैसे मुद्दों पर वे धरने पर बैठ रहे हैं। क्या आप साथ आएंगे? अखिलेश के अनुसार, उन्होंने बिना एक पल गंवाए अपनी गाड़ी उठाई और अपने सांसदों के साथ सीधे प्रदर्शन स्थल की ओर निकल पड़े।

क्या है सियासी संदेश? अखिलेश यादव का राहुल गांधी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बैठना और फिर पुलिस हिरासत में जाना, कोई सामान्य घटना नहीं है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसके जरिए विपक्षी गठबंधन ने तीन बड़े संकेत दिए हैं:

  1. विपक्षी एकजुटता पर मुहर: लोकसभा चुनाव के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि सपा-कांग्रेस में दूरी बढ़ सकती है, लेकिन इस साझा प्रदर्शन ने फिर साबित कर दिया है कि दोनों दल किसी भी बड़े मुद्दे पर एक साथ हैं।
  2. पीडीए + युवा कॉम्बिनेशन: सपा का पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वोट बैंक अब युवा और छात्र शक्ति के साथ मिलकर बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाने की तैयारी में है।
  3. बेरोजगारी ही चुनावी मुद्दा: नीट धांधली और नौकरियों को लेकर दोनों नेता अब सड़क पर आक्रामक रुख अपना चुके हैं। यह साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनावों में वे इसी मुद्दे को सबसे बड़ा हथियार बनाने वाले हैं।

2027 की राह क्या होगी कठिन? 2024 के लोकसभा चुनावों में यूपी के लड़कों की इस जोड़ी ने बीजेपी को उत्तर प्रदेश में करारा झटका दिया था। अब 2027 के लिए समय रहते ही दोनों का सड़क पर उतरकर एक साथ मुद्दे उठाना, सत्ताधारी दल के लिए नई चुनौती है। यदि राहुल और अखिलेश इसी तरह दिल्ली से लखनऊ तक एक साथ नजर आते रहे, तो बीजेपी के लिए बेरोजगारी और परीक्षा धांधली जैसे धरातलीय सवालों का जवाब देना आसान नहीं होगा।

फिलहाल, इस फोन कॉल ने न केवल छात्रों के मुद्दे को नई धार दी है, बल्कि विपक्ष की आगामी रणनीति का ब्लूप्रिंट भी सामने रख दिया है।

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