वंदे मातरम का अपमान अब बनेगा जुर्म: क्या कानून से तय होगी देशभक्ति?
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केंद्र सरकार राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 लेकर आ रही है। अगर यह बिल संसद से पारित हो जाता है, तो वंदे मातरम का अपमान करना कानूनी रूप से उतना ही गंभीर अपराध होगा जितना कि राष्ट्रीय गान जन गण मन का अपमान करना।

क्या है नया कानून? 1971 के राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम में संशोधन कर सरकार वंदे मातरम को सीधे इसके दायरे में लाना चाहती है। वर्तमान में इस कानून की धारा 3 केवल राष्ट्रीय गान पर लागू होती है। संशोधन के बाद, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर वंदे मातरम गाने से रोकता है या गायन में बाधा डालता है, तो उसे 3 साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है।

सरकार की दलील क्या है? सरकार का तर्क है कि वंदे मातरम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान करोड़ों भारतीयों की प्रेरणा रहा है। वर्ष 1950 में संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की थी कि वंदे मातरम को जन गण मन के समान सम्मान दिया जाएगा। गृह मंत्रालय का मानना है कि इस ऐतिहासिक सम्मान को अब कानूनी सुरक्षा देने का समय आ गया है।

विवाद की जड़: देशभक्ति या मजबूरी? इस बिल का विरोध भी शुरू हो गया है। सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर बिल वापस लेने की मांग की है। आलोचकों और संवैधानिक विशेषज्ञों का तर्क है कि देशभक्ति कोई कानूनी मजबूरी नहीं है जो डंडे के जोर पर लागू की जाए। यह स्वेच्छा और भावना से जुड़ी चीज है।

धार्मिक प्रतीकों और इतिहास का पेच विवाद का एक बड़ा कारण वंदे मातरम के बाद के अंतरे हैं, जिनमें देवी दुर्गा का उल्लेख है। 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने इसी कारण केवल शुरुआती दो अंतरों को सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए स्वीकार किया था ताकि सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान बना रहे। विपक्ष का कहना है कि कानून बनने के बाद इन ऐतिहासिक बारीकियों को संभालना मुश्किल होगा।

अदालत का रुख क्या कहता है? सुप्रीम कोर्ट के बीजॉय इमैनुएल (1986) फैसले के मुताबिक, किसी को भी राष्ट्र गान गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, चुप रहना अपमान नहीं है। अब देखना यह है कि यदि प्रस्तावित बिल कानून बनता है, तो भविष्य में अदालतें गायन में बाधा और अभिव्यक्ति की आजादी के बीच के बारीक अंतर को कैसे परिभाषित करती हैं।

क्या अनिवार्य है वंदे मातरम गाना? स्पष्ट रहे कि प्रस्तावित विधेयक किसी के लिए वंदे मातरम गाना अनिवार्य नहीं बनाता है। यह कानून केवल व्यवधान डालने वालों पर कार्रवाई के लिए है। हालांकि, कानूनी जानकारों के मुताबिक, यह बिल भविष्य में सम्मान की कानूनी सीमा तय करने को लेकर बड़ी बहस छेड़ सकता है।

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