गुजरात का महा-सफाई अभियान: भरूच में ₹2153 करोड़ के ड्रग्स राख, 278 पुलिसकर्मी सम्मानित
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गुजरात सरकार ने नशे के कारोबारियों पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है। राज्य के भरूच जिले के दाहेज में एक विशेष अभियान के तहत ₹2153 करोड़ मूल्य के नशीले पदार्थों को वैज्ञानिक और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से नष्ट कर दिया गया। इस कार्यक्रम में राज्य के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए।

विशाल मात्रा में नशीले पदार्थ स्वाहा इस कार्रवाई में राज्य की 24 पुलिस इकाइयों द्वारा 867 अलग-अलग मामलों में जब्त किए गए ड्रग्स को नष्ट किया गया। इस कंसाइनमेंट में 13,249 किलोग्राम से अधिक ड्रग्स और 5.71 लाख से अधिक नशीली बोतलों का स्टॉक शामिल था। एनवायरो इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान डिप्टी सीएम ने लकड़िया में नारकोटिक्स डिस्ट्रक्शन प्रोग्राम का वर्चुअली उद्घाटन भी किया।

जांच अधिकारियों के लिए नई एनडीपीएस हैंडबुक इस मौके पर गुजरात पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स द्वारा तैयार की गई एनडीपीएस हैंडबुक लॉन्च की गई। इसका उद्देश्य जांच अधिकारियों को कानूनी प्रक्रियाओं की बेहतर समझ देना और नशा तस्करों के खिलाफ केस को और अधिक मजबूत बनाना है। इसके अलावा, प्रदर्शनी के माध्यम से ड्रग-फ्री गुजरात की दिशा में चल रहे प्रयासों को भी उजागर किया गया।

नशा तस्करों का नेटवर्क होगा ध्वस्त डिप्टी सीएम हर्ष सांघवी ने कहा कि ड्रग्स आज समाज की सबसे बड़ी बुराई है। उन्होंने गुजरात पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि अशांत समुद्री सीमाओं और अंतर-राज्यीय नेटवर्क में कड़ी चुनौती के बावजूद पुलिस ने ड्रग तस्करों की कमर तोड़ दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुजरात में ड्रग्स से जुड़े मामलों में सजा की दर अभी 65% है, जिसे भविष्य में 100% तक ले जाने का लक्ष्य है।

इनाम के साथ पुलिस का हौसला बुलंद नशीले पदार्थों के खिलाफ इस जंग में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 278 पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया गया। राज्य सरकार की ड्रग रिवॉर्ड पॉलिसी के तहत इन अधिकारियों को कुल ₹59.42 लाख की इनामी राशि दी गई। सरकार ने यह संदेश दिया है कि ड्रग्स के खिलाफ काम करने वाले हर योद्धा को पूरा सम्मान और प्रोत्साहन दिया जाएगा।

ड्रग-फ्री गुजरात के लिए सामूहिक संकल्प डिप्टी सीएम ने पुलिस की मानवीय पहल का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार तस्करों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस उन युवाओं की पहचान करती है जो नशे की लत का शिकार हैं। इसके बाद उन्हें और उनके परिवारों को सुधारने के लिए काउंसलिंग दी जाती है। अंत में, उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि ड्रग-फ्री गुजरात का लक्ष्य केवल पुलिस की सख्ती से नहीं, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी से ही संभव होगा।

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