होर्मुज जलडमरूमध्य पर सुलगा युद्ध: अमेरिका की लगातार 10वीं रात बमबारी, ईरान पर चौतरफा दबाव
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तेहरान/वाशिंगटन: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर जारी तनाव अब पूर्ण युद्ध की दहलीज पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने लगातार 10वीं रात ईरान के भीतर कई सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी की है। यह कार्रवाई एक अमेरिकी सैनिक की मौत और ईरान द्वारा अमेरिका के सहयोगी देशों—कुवैत, जॉर्डन और बहरीन पर किए गए हमलों के जवाब में की गई है।

ईरानी सैन्य क्षमता को नष्ट करने पर जोर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्पष्ट किया है कि ये हमले ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को ध्वस्त करने के लिए हैं, जिनका उपयोग वह होर्मुज में व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए करता है। हमलों में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांड सेंटर, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्च पैड्स और संचार नेटवर्क को प्रमुखता से निशाना बनाया गया है। तेहरान के पास तबरीज में स्थित भूमिगत मिसाइल बेस के पास भी एक व्यक्ति की मौत की सूचना है।

सहयोगी देशों पर भी ईरानी हमले तनाव तब और बढ़ गया जब ईरान ने मिडिल ईस्ट स्थित अमेरिकी सहयोगियों को निशाना बनाया। कुवैत, जॉर्डन और बहरीन पर हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों ने क्षेत्रीय अस्थिरता गहरा दी है। बहरीन ने नागरिक एयर ट्रैफिक को निशाना बनाने वाली ईरानी गतिविधियों की कड़ी निंदा की है, वहीं जॉर्डन ने अपनी सीमाओं में तीन ईरानी मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया है।

लाल सागर पर नया खतरा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक और बड़ा संकट तब खड़ा हो गया जब यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की धमकी दी। हूतियों ने लाल सागर में जाने वाले जहाजों को रोकने का ऐलान किया है। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के कारण सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए लाल सागर ही एकमात्र प्रमुख विकल्प है। यदि हूतियों ने इसे बाधित किया, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल तय है।

महंगाई का असर: आसमान छूते तेल के दाम इस संघर्ष ने आम अमेरिकी नागरिकों की जेब पर सीधा प्रहार किया है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 88 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं और अमेरिका में गैसोलीन की औसत कीमत 4 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले यह स्थिति राष्ट्रपति प्रशासन के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गई है।

ट्रंप की दो टूक: ईरान को चुकानी होगी भारी कीमत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अमेरिकी सैनिकों की हत्या के लिए उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। राष्ट्रपति ने ईरान के बुनियादी ढांचे, जिसमें पावर स्टेशन और पुल शामिल हैं, को निशाना बनाने के संकेत दिए हैं ताकि तेहरान को होर्मुज से अपनी पकड़ ढीली करने के लिए मजबूर किया जा सके।

कूटनीति की बची उम्मीद युद्ध की इन विभीषिकाओं के बीच, कूटनीतिक गलियारों से थोड़ी उम्मीद की किरण भी दिखी है। ईरान के गृह मंत्री ने पाकिस्तान का दौरा किया है, जो इस संकट में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। हालांकि, जमीन पर हालात अभी भी बेहद नाजुक हैं और दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

होर्मुज की नाकेबंदी ने पहले ही वैश्विक तेल आपूर्ति की कमर तोड़ दी है, और यदि यह संघर्ष नहीं थमा, तो आने वाले दिन न केवल मिडिल ईस्ट, बल्कि पूरी दुनिया के लिए आर्थिक और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण होंगे।

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