यूपी चुनाव 2027: रेखा गुप्ता की एंट्री से बदली बीजेपी की बिसात, क्या बनिया कार्ड बनेगा गेम चेंजर?
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी व्यूहरचना तेज कर दी है। इस चुनावी शंखनाद के बीच दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का यूपी दौरा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है। धार्मिक यात्रा के बहाने रेखा गुप्ता की वाराणसी और मिर्जापुर में सक्रियता ने कई बड़े सियासी संकेत दिए हैं।

धार्मिक यात्रा या शक्ति प्रदर्शन? शनिवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता वाराणसी पहुंचीं। उन्होंने मिर्जापुर के विंध्यवासिनी मंदिर में दर्शन-पूजन किया और काशी विश्वनाथ का आशीर्वाद लिया। हालांकि यह दौरा आधिकारिक तौर पर उनके जन्मदिन और धार्मिक आस्था से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन जिस तरह से जगह-जगह बीजेपी महिला मोर्चा ने उनका स्वागत किया, उससे साफ है कि संगठन स्तर पर उनकी एंट्री की जमीन तैयार की जा चुकी है।

पीडीए की काट और बनिया समीकरण राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रेखा गुप्ता का यूपी दौरा महज एक संयोग नहीं है। बीजेपी समाजवादी पार्टी के PDA फॉर्मूले की काट के लिए एक नए सामाजिक समीकरण पर काम कर रही है। रेखा गुप्ता वैश्य (बनिया) समुदाय से आती हैं। उत्तर प्रदेश की करीब 60 से 70 शहरी विधानसभा सीटों पर बनिया मतदाता निर्णायक भूमिका में होते हैं। बीजेपी इस कदम से अपने पारंपरिक वोट बैंक को यह संदेश देना चाहती है कि पार्टी में वैश्य समाज का कद सर्वोपरि है।

क्या रेखा गुप्ता बनेंगी बीजेपी का ट्रंप कार्ड ? रेखा गुप्ता की छवि एक फायरब्रांड और अनुभवी नेत्री की रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ से लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री बनने तक का उनका सफर उन्हें एक मजबूत लीडर के रूप में स्थापित करता है। बीजेपी उन्हें आगामी 2027 के चुनाव में स्टार प्रचारक के रूप में मैदान में उतार सकती है।

महिला और विकास मॉडल पर जोर बीजेपी का मानना है कि योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता के साथ यदि रेखा गुप्ता जैसा चेहरा जुड़ता है, तो महिला सशक्तिकरण और विकास के मॉडल को और अधिक मजबूती से पेश किया जा सकेगा। पूर्वांचल के व्यापारियों और वैश्य समाज में उनकी सक्रियता विपक्ष के उन दावों को फेल करने की रणनीति है, जिसमें वे गैर-यादव ओबीसी और वैश्य वोटों में सेंधमारी की कोशिश कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, दिल्ली के बाद अब रेखा गुप्ता का उत्तर प्रदेश में सक्रिय होना यह बताता है कि 2027 के महासंग्राम के लिए बीजेपी ने अपने सबसे भरोसेमंद वोट बैंक को साधने के लिए एक बड़ा दांव चल दिया है।

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