# तेल नहीं, अब पानी है जंग का सबसे बड़ा हथियार: ईरान के हमले से कांप उठा खाड़ी क्षेत्र
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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब एक नए और भयावह मोड़ पर पहुंच गया है। अब तक दुनिया की नजरें केवल तेल के कुओं और होर्मुज स्ट्रेट की घेराबंदी पर टिकी थीं, लेकिन ईरान के ताजा हमले ने युद्ध के सबसे संवेदनशील मोर्चे को उजागर कर दिया है—पीने का पानी।

कुवैत में मची तबाही शुक्रवार को ईरान ने कुवैत के एक प्रमुख पावर और डिसेलिनेशन (समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बनाने वाला) प्लांट को निशाना बनाया। इस हमले से कई बिजली उत्पादन इकाइयां ठप हो गईं और भारी आग लग गई। हालांकि कुवैती अधिकारियों का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन इस घटना ने खाड़ी देशों में हड़कंप मचा दिया है।

रेगिस्तान की लाइफलाइन पर खतरा कुवैत, सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों के पास मीठे पानी के प्राकृतिक स्रोत न के बराबर हैं। कुवैत का 90%, ओमान का 86% और सऊदी अरब का 70% पेयजल सीधे डिसेलिनेशन प्लांट से आता है। ये प्लांट न केवल पानी, बल्कि बिजली का भी मुख्य स्रोत हैं। इन पर हमला सीधे तौर पर आम लोगों के अस्तित्व पर चोट है।

CIA की पुरानी चेतावनी हुई सच वर्ष 2010 में अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने एक अध्ययन में स्पष्ट चेतावनी दी थी कि डिसेलिनेशन प्लांट्स पर हुआ हमला खाड़ी देशों के लिए राष्ट्रीय संकट पैदा कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर इन महत्वपूर्ण उपकरणों को नष्ट किया गया, तो पानी की सप्लाई सामान्य होने में महीनों का समय लग सकता है। 15 साल बाद आज यह चेतावनी हकीकत में बदलती दिख रही है।

क्या है ईरान की रणनीति? अब तक यह माना जाता था कि युद्ध बढ़ने पर केवल तेल की कीमतें आसमान छुएंगी। लेकिन ईरान ने दिखा दिया है कि वह वहां प्रहार कर सकता है, जहां लोगों की दैनिक जिंदगी टिकी है। खाड़ी तट पर स्थित सैकड़ों प्लांट ईरान के ड्रोन और मिसाइलों की सीधी रेंज में हैं।

56 प्लांट, जो तय करते हैं करोड़ों की प्यास क्षेत्र की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खाड़ी देशों की 90% से अधिक पानी की आपूर्ति केवल 56 बड़े डिसेलिनेशन प्लांट्स पर निर्भर है। यदि इनमें से कुछ भी महत्वपूर्ण प्लांट लंबे समय के लिए बंद होते हैं, तो कई प्रमुख शहरों में पानी का भीषण अकाल पड़ना निश्चित है। युद्ध का यह नया स्वरूप भविष्य के संघर्षों की एक डरावनी तस्वीर पेश कर रहा है।

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