वांगचुक की गिरफ्तारी पर सिब्बल का तंज, पूछा- अन्ना आंदोलन वाली नैतिकता अब कहां गई?
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दिल्ली: जंतर-मंतर पर 21 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन हिरासत में लिए जाने के बाद राजनीति गरमा गई है। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने बयानों की याद दिलाई है।

पुलिस की कार्रवाई और सिब्बल के सवाल दिल्ली पुलिस का कहना है कि डॉक्टरों की सलाह और उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। लेकिन सिब्बल ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जिस तरह से वांगचुक को सफेद चादर में लपेटकर ले जाया गया, वह चिंताजनक है।

क्या मोदी जी को अपना पुराना दौर याद नहीं? कपिल सिब्बल ने अन्ना हजारे के आंदोलन के समय का जिक्र किया। उन्होंने कहा, जब मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने अन्ना आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार पर तीखे हमले किए थे। उन्होंने कहा था कि काश वे मुख्यमंत्री न होते, तो वे वहां जाकर पूछते कि सरकार रात के अंधेरे में लोगों को कैसे उठा सकती है? सिब्बल ने तंज कसते हुए कहा कि आज जब वे स्वयं सत्ता में हैं, तो वही काम खुद कर रहे हैं।

युवाओं के भविष्य और मौन पर वार सिब्बल ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि वे सत्ता के नशे में जनता की आवाज अनसुनी कर रहे हैं। उन्होंने पूछा, देश के युवा जो पेपर लीक की घटनाओं से बर्बाद हो रहे हैं, उनसे पीएम ने बात क्यों नहीं की? मन की बात में कभी इस दर्द का जिक्र तक नहीं किया गया।

सिर्फ सत्ता बचाना ही सरकार का एकमात्र लक्ष्य सांसद ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार का ध्यान आम लोगों की समस्याओं के बजाय सिर्फ अपनी सत्ता को मजबूत करने पर है। उन्होंने कहा, सरकार को इसकी चिंता है कि कैसे दूसरी पार्टियों को तोड़ें, कैसे संविधान बदलें और कैसे अपना बहुमत बढ़ाएं। उन्हें आम आदमी की भूख और उनके संघर्षों से कोई सरोकार नहीं रह गया है।

विरोध का हक और सरकार का दायित्व सिब्बल ने याद दिलाया कि अनशन विरोध का एक लोकतांत्रिक तरीका है और सरकार को संवाद का रास्ता खुला रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि अन्ना आंदोलन के समय तत्कालीन सरकार ने बातचीत के द्वार खोले थे, लेकिन मौजूदा सरकार ने संवाद की हर संभावना को खत्म कर दिया है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

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