लद्दाख में शिक्षा सुधारों और पर्यावरण संरक्षण के लिए मशहूर सोनम वांगचुक इन दिनों फिर से चर्चा में हैं। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर 21 दिनों तक आमरण अनशन करने वाले वांगचुक को हाल ही में पुलिस बल के जरिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके इस संघर्ष के बीच लोगों की दिलचस्पी उनके निजी जीवन और परिवार को जानने में बढ़ गई है।
सोनम वांगचुक के पिता, सोनम वांग्याल, लद्दाख के एक प्रभावशाली नेता थे। वे नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के साथ जुड़े रहे और जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सदस्य के साथ-साथ कैबिनेट मंत्री भी रहे। 1984 में लद्दाख को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने के लिए उन्होंने भी आमरण अनशन किया था। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने खुद लेह पहुंचकर उनका अनशन तुड़वाया था, जिसके बाद 1989 में लद्दाख को एसटी का दर्जा मिला।
सोनम वांगचुक का जन्म 1 सितंबर 1966 को लेह के उलेतोकपो गांव में हुआ था। उस समय गांव में कोई स्कूल नहीं था, इसलिए 9 साल की उम्र तक उन्हें उनकी मां सेरिंग वांगमो ने घर पर ही पढ़ाया। अपनी मातृभाषा लद्दाखी में मिली शुरुआती शिक्षा का वांगचुक अक्सर जिक्र करते हैं। खेती-बाड़ी और प्रकृति के साथ बिताया गया वह बचपन ही उनके भविष्य के टिकाऊ विकास (Sustainable Development) के कार्यों का आधार बना।
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. एंगमो एक सोशल एंटरप्रेन्योर और शिक्षिका हैं। ओड़िशा में जन्मीं गीतांजलि ने एमबीए किया है और वे शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे न केवल एक पेशेवर महिला हैं, बल्कि कराटे में ब्लैक बेल्ट और 2009 की वर्ल्ड चैंपियन भी रह चुकी हैं। वे अक्सर कठिन दौर में वांगचुक के साथ मजबूती से खड़ी नजर आती हैं।
हाल ही में वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनके परिवार को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबरों के अनुसार, उनकी पत्नी गीतांजलि को अस्पताल के कमरे में फोन ले जाने से रोका गया और परिवार के साथ उनकी मेडिकल रिपोर्ट साझा नहीं किए जाने के आरोप भी लगे हैं। वांगचुक के बच्चों या अन्य पारिवारिक सदस्यों के बारे में सार्वजनिक रूप से बहुत कम जानकारी मौजूद है, क्योंकि वे अपने परिवार को मीडिया की चकाचौंध से दूर रखते हैं।
लद्दाख से ही आने वाले एक और प्रसिद्ध व्यक्ति सोनम वांग्याल का नाम अक्सर लोग वांगचुक के परिवार से जोड़ देते हैं। वे एक प्रतिष्ठित पर्वतारोही और ITBP के जवान थे, जिन्होंने 1965 में माउंट एवरेस्ट फतह कर इतिहास रचा था। हालांकि, उनका सोनम वांगचुक के परिवार से कोई संबंध नहीं है।
*Peak Dictatorship Happening At Safdarjung Hospital By Govt
— Cockroach is Back (@Cockroachisback) July 18, 2026
Sonam sir’s wife is not allowed to take her phone inside hospital room. His medical reports are not shared with the family. No personal lawyers or doctors are allowed to meet pic.twitter.com/Xj61IMUBwR
मंथन 2026: दिल्ली में सजेगा दिग्गजों का महामंच, राजनीति से मनोरंजन तक छिड़ेगी बहस
टीम इंडिया से अलग हुए विराट कोहली: लंदन पहुंचते ही होटल से सीधे घर के लिए निकले किंग
अहमदाबाद पटाखा फैक्ट्री हादसा: धमाके में 8 की मौत, PM मोदी ने जताया दुख
मेसी का बेबी यमाल कनेक्शन: 19 साल पुरानी वायरल फोटो पर दिग्गज खिलाड़ी ने तोड़ी चुप्पी
मानसून का नया मूड : दिल्ली से बिहार तक कब होगी मूसलाधार बारिश? जानें IMD का लेटेस्ट अलर्ट
मणिपुर में गूंजेगी बप्पा की जयकार: महाराष्ट्र सरकार बनाएगी भव्य सिद्धिविनायक मंदिर
8 घंटे फोन चलाकर नीट में टॉप: फरीदाबाद के पांशुल बंसल ने साबित किया, स्मार्ट तरीके से पढ़ना जरूरी
लॉकअप 2 में मचा घमासान: क्या शिवांगी जोशी के प्यार में अपना गेम बिगाड़ रहे हैं हर्षद चोपड़ा?
कुमाऊं से गढ़वाल का सफर अब आसान: रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस का हुआ आगाज
पिता ने बेटियों को बनाया योद्धा , मार्शल आर्ट ट्रेनिंग का वीडियो इंटरनेट पर छाया