जन सुराज में महा-पलायन : चेतना झांब समेत कई दिग्गज नेताओं ने थामा भाजपा का हाथ
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पटना। बिहार की राजनीति में उपचुनाव से ठीक पहले प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज गहरे संकट में घिरी नजर आ रही है। पार्टी के भीतर इस्तीफों का दौर जारी है। एक के बाद एक बड़े नेताओं और पूर्व प्रत्याशियों के पार्टी छोड़ने से जन सुराज के चुनावी समीकरण पूरी तरह से बिगड़ते दिख रहे हैं।

चेतना झांब और अन्य प्रमुख चेहरों का पार्टी से किनारा गुरुवार का दिन जन सुराज के लिए बड़ा राजनीतिक झटका लेकर आया। मशहूर फिल्म डायरेक्टर और जन सुराज की पूर्व प्रत्याशी चेतना झांब ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनके साथ ही फतुहा की प्रखंड प्रमुख श्रुति श्री और वीआईपी पार्टी के नेता आनंद मधुकर यादव ने भी भाजपा का दामन थाम लिया है।

केसी सिन्हा सहित कई पूर्व प्रत्याशियों का ‘मोहभंग’ पलायन का यह सिलसिला केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहा। इससे एक दिन पहले ही बांकीपुर से जन सुराज के प्रत्याशी रहे प्रोफेसर केसी सिन्हा ने भाजपा ज्वाइन कर ली थी। उनके साथ ही दीघा से पूर्व प्रत्याशी बिट्टू सिंह और मनेर से पूर्व प्रत्याशी गोपाल सिंह ने भी प्रशांत किशोर का साथ छोड़ने का एलान कर दिया। इन नेताओं के जाने से पार्टी का जमीनी आधार कमजोर होता दिख रहा है।

प्रशांत किशोर पर तीखे हमले भाजपा में शामिल होने के बाद नेताओं ने प्रशांत किशोर के खिलाफ मोर्चे खोल दिए हैं। गोपाल सिंह ने पीके पर अहंकारी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पास बिहार के विकास का कोई विजन नहीं है। वहीं, बिट्टू सिंह ने स्पष्ट किया कि अब उनका राजनीतिक भविष्य केवल भाजपा के साथ सुरक्षित है।

सड़कों पर पोस्टर वॉर इस बीच, पटना की सड़कों पर लगे एक पोस्टर ने राजनीतिक पारे को और गर्मा दिया है। पोस्टर में प्रशांत किशोर पर तंज कसते हुए लिखा गया है, केसी सिन्हा तो सिर्फ झांकी है, जमानत जब्त होना अभी बाकी है। इनको वोट नहीं, नोट चाहिए। पोस्टर में पीके को विशेष वेशभूषा में दिखाया गया है, जो चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

भाजपा का दावा: जन सुराज का किला ढह रहा है भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने इन नेताओं का स्वागत करते हुए इसे पार्टी की विचारधारा की जीत बताया है। भाजपा का दावा है कि जन सुराज के नेता अब पीके के दावों से ऊब चुके हैं और प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों से प्रेरित होकर भाजपा में शामिल हो रहे हैं। वहीं, इस घटनाक्रम ने प्रशांत किशोर के लिए चुनावी राह को बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

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