रामपुर में ढहा आजम खान का तिलिस्म: कभी भैंस ढूंढने के लिए पुलिस लगा देने वाले नेता का अब वजूद खतरे में
News Image

उत्तर प्रदेश के रामपुर में पिछले चार दशकों तक एकछत्र राज करने वाले समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान का दौर अब इतिहास के पन्नों में सिमटता दिख रहा है। 1980 से राजनीति में कदम रखने वाले आजम खान, जो 10 बार विधायक और दो बार सांसद रहे, आज अपनी ही बनाई जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए कानूनी जद्दोजहद में फंसे हैं।

भैंस चोरी से शुरू हुआ था रौला आजम खान के प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब 2014 में उनके फार्महाउस से 7 भैंसें चोरी हुई थीं, तो प्रशासन ने उन्हें खोजने के लिए पूरी पुलिस फोर्स झोंक दी थी। बरामदगी के बाद उन भैंसों की खातिरदारी किसी वीआईपी से कम नहीं थी, लेकिन समय का पहिया ऐसा घूमा कि आज वही आजम खान जेल की सलाखों के पीछे हैं और उनके खिलाफ दर्जनों मामले कानूनी शिकंजे के रूप में सामने आ रहे हैं।

जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रशासन का बुलडोजर हालिया घटनाक्रम में रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को अवैध घोषित कर इन्हें ढहाने का आदेश दिया है। आजम खान की पत्नी और पूर्व विधायक डॉ. तंजीन फातिमा ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए यूनिवर्सिटी परिसर से पुलिसकर्मियों को बाहर निकाला। हालांकि, प्रशासन अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है।

सार्वजनिक हुई निजी सड़क आजम खान के पतन का एक बड़ा संकेत वह सड़क है जो उनकी यूनिवर्सिटी से होकर गुजरती है। 2016-17 में करीब 17 करोड़ की लागत से बनी इस सड़क को 2019 से अवैध रूप से बंद कर दिया गया था। अब लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इसे आम रास्ता घोषित कर दिया है और मुख्य द्वार पर साइनबोर्ड लगा दिए हैं। यह कदम जनता के लिए उस किले के दरवाजे खोलने जैसा है, जिसे आजम खान ने अपना निजी क्षेत्र बना लिया था।

कानूनी गलतियों ने बिछाया पतन का फर्श आजम खान का पतन तब शुरू हुआ जब उनके और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और पैन कार्ड मामले सामने आए। इन दस्तावेजों में हेराफेरी ने विरोधियों को कानूनी हथियार थमा दिए। इसके बाद भड़काऊ भाषण और जमीन कब्जाने जैसे 100 से अधिक मामलों में उन पर कार्रवाई हुई। विधानसभा सदस्यता रद्द होने और चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध ने उनकी राजनीतिक ताकत को शून्य पर लाकर खड़ा कर दिया है।

सियासी प्रतिक्रिया और भविष्य यूनिवर्सिटी पर हो रही कार्रवाई को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस इसे बदले की राजनीति और तोड़फोड़ की नीति करार दे रहे हैं। वहीं, भाजपा सरकार का स्पष्ट रुख है कि यह नियम विरुद्ध निर्माण और सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग रोकने की कवायद है। रामपुर की जनता के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आजम खान का यह आखिरी किला भी पूरी तरह ढह जाएगा, या सियासी दांव-पेंच अभी बाकी हैं।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

ईरान में अमेरिकी हमले से दहला कैंसर अस्पताल, कीमोथेरेपी ले रहे 211 बच्चों को करना पड़ा रेस्क्यू

Story 1

नोएडा एयरपोर्ट के पास नया इंडस्ट्रियल कॉरिडोर: अब आगरा की तरफ बढ़ेगा निवेश और रफ्तार!

Story 1

दिल्ली से अहमदाबाद तक: अमित शाह की अटूट आस्था और 149वीं जगन्नाथ रथयात्रा की भव्यता

Story 1

कायरन पोलार्ड का टी20 में सेंचुरी ऑफ सिक्सेस से धमाका, क्रिस गेल का रिकॉर्ड खतरे में!

Story 1

होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों की तैनाती पर रोक, खाड़ी संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला

Story 1

घर की सफाई में मिली 20 साल पुरानी SBI पासबुक, क्या वापस मिल सकता है मरहूम दादाजी का पैसा?

Story 1

निकोलस पूरन का खौफनाक शतक: क्रिस गेल का वर्ल्ड रिकॉर्ड टूटते-टूटते बचा

Story 1

2026: ओटीटी पर किसका रहा दबदबा? क्रिकेट के तूफान के बीच रियलिटी शो और फिल्मों ने भी मारी बाजी

Story 1

मानसून सत्र से पहले विपक्षी एकता में दरार: परिसीमन बिल पर सुप्रिया सुले के बयान से INDIA गठबंधन में बवाल

Story 1

IRCTC का नया अवतार: 24 साल बाद बदली रेलवे की वेबसाइट, टिकट बुकिंग अब होगी सुपरफास्ट