NCP-SP में फूट की अटकलों पर सुप्रिया सुले का पूर्णविराम, कहा- गपशप के लिए मेरे पास समय नहीं
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मुंबई: एनसीपी (शरद पवार गुट) में टूट की खबरों पर पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने तीखा प्रहार करते हुए सभी अफवाहों को खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पार्टी पूरी तरह से एकजुट है और इन दावों में कोई सच्चाई नहीं है।

सूत्रों पर नहीं, सच पर करती हूं यकीन सुप्रिया सुले ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा, मेरे पास गपशप (gossip) में अपना समय बर्बाद करने के लिए फालतू समय नहीं है। मैं सूत्रों नहीं, बल्कि असलियत पर भरोसा करती हूं। मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकती हूं कि हमारे सभी 8 सांसद और सभी विधायक एकजुट हैं।

शरद पवार का कुशल नेतृत्व उन्होंने पार्टी की मजबूती का श्रेय शरद पवार को देते हुए कहा, हमारी पार्टी का नेतृत्व न सिर्फ शरद पवार करते हैं, बल्कि वे हर एक कार्यकर्ता की बात को गंभीरता से सुनते हैं। एक नेता के तौर पर उनकी सुनने की क्षमता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।

मुलाकात को साजिश बताना गलत हाल ही में मुख्यमंत्री आवास पर हुई नेताओं की बैठक के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई थी। इस पर सफाई देते हुए सुले ने कहा, जयंत पाटिल मुख्यमंत्री से मिलने दिन के उजाले में अपनी गाड़ी से गए थे। इसमें कुछ भी छिपा हुआ या रहस्यमयी नहीं था। हर मुलाकात को राजनीतिक साजिश के चश्मे से देखना बंद होना चाहिए।

निजी संबंध बनाम राजनीति सुले ने उदाहरण देते हुए कहा कि कल उन्होंने संसद में नाश्ते के दौरान योगी आदित्यनाथ से और बाद में अखिलेश-डिंपल यादव से भी मुलाकात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मिलना-जुलना पारिवारिक और शिष्टाचार के नाते होता है, इसे राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

क्या है पूरा विवाद? दरअसल, हाल ही में कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने दावा किया था कि केंद्र सरकार एक राष्ट्र, एक चुनाव (131वां संविधान संशोधन) बिल के लिए एनसीपी (एसपी) का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही है। इसी के चलते सत्ताधारी और विपक्षी नेताओं की मुलाकात को फूट के रूप में देखा जा रहा था। सुप्रिया सुले ने इन तमाम दावों को महज अटकलें करार दिया है।

मंत्री पद पर क्या बोलीं सुप्रिया? मंत्रिमंडल में शामिल होने की अटकलों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया पिछले 12 सालों से उनके मंत्री बनने की भविष्यवाणियां कर रहा है। उन्होंने साफ किया कि कौन सा पद किसे मिलेगा, यह फैसला मुख्यमंत्री का होता है और इस पर की जा रही चर्चाएं बेबुनियाद हैं। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से तुरंत 33% महिला आरक्षण लागू करने की मांग भी दोहराई।

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