नई दिल्ली: सीबीएसई (CBSE) की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) पर अब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपना लिया है। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कानूनी सहायता मांगी है।
अदालत ने छात्रों की पीड़ा को समझा सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि छात्रों के बीच पनप रही निराशा और असंतोष को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने माना कि यह मुद्दा सीधे तौर पर लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए इस पर संतुलित और पारदर्शी समाधान की जरूरत है।
क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग का पूरा विवाद? सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) में आरोप लगाया गया है कि वर्तमान डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि केंद्र सरकार और सीबीएसई को इस सिस्टम के लिए सख्त और स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने चाहिए ताकि मूल्यांकन में किसी भी प्रकार की मानवीय या तकनीकी चूक न हो।
कैसे काम करता है CBSE का OSM सिस्टम? ऑन-स्क्रीन मार्किंग एक आधुनिक डिजिटल प्रक्रिया है। इसमें छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को पहले स्कैन किया जाता है और फिर शिक्षकों को फिजिकल कॉपी के बजाय कंप्यूटर स्क्रीन पर कॉपियां दिखाई जाती हैं। सीबीएसई का तर्क है कि इससे परिणाम तेजी से घोषित होते हैं और डेटा का रिकॉर्ड रखना आसान होता है। हालांकि, तकनीकी खामियों और पारदर्शिता के अभाव के कारण छात्र लंबे समय से इसका विरोध कर रहे हैं।
छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सुनवाई? फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है, लेकिन अदालत की सक्रियता से छात्रों में उम्मीद जगी है। यदि कोर्ट मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव या नए नियमों को लागू करने का निर्देश देता है, तो भविष्य में होने वाली सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन में व्यापक सुधार देखने को मिल सकते हैं।
इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की भूमिका अहम होगी, क्योंकि वे सरकार और सीबीएसई का पक्ष रखते हुए कोर्ट को इस प्रणाली की सीमाओं और सुधारों की संभावनाओं से अवगत कराएंगे।
STORY | SC flags frustration of students in CBSE’s digital marking system, seeks SG’s assistance
— Press Trust of India (@PTI_News) July 15, 2026
Expressing concern over students’ “frustration in CBSE’s digital marking system, the Supreme Court on Wednesday sought the assistance of Solicitor General Tushar Mehta in hearing… pic.twitter.com/gIOp5Q0IZp
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