दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और निर्माण कार्यों से उड़ती धूल पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने एक बड़ा तकनीकी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने डस्ट पोर्टल 2.0 लॉन्च किया है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से निर्माण स्थलों पर नजर रखेगा। यह सिस्टम 500 वर्ग गज से बड़े सभी निर्माण कार्यों के लिए अनिवार्य होगा।
दिल्ली की हवा में प्रदूषण का एक बड़ा हिस्सा धूल का है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राजधानी के कुल वायु प्रदूषण में धूल की हिस्सेदारी गर्मियों में 27% और सर्दियों में 15% तक रहती है। इसके अलावा, PM-10 उत्सर्जन में धूल का योगदान 66% और PM-2.5 में 38% है। इसी चुनौती से निपटने के लिए इस पोर्टल को तैयार किया गया है।
यह पोर्टल अत्याधुनिक तकनीकों का एक मिश्रण है। इसमें निम्नलिखित फीचर्स शामिल किए गए हैं:
पुरानी मैनुअल निगरानी की जगह अब यह सिस्टम ऑटोमैटिक काम करेगा। पोर्टल के जरिए अनुपालन प्रमाणपत्र (Compliance Certificate) जारी किए जा सकेंगे। यदि कोई निर्माण स्थल नियमों का उल्लंघन करता है, तो सिस्टम खुद ही एनफोर्समेंट नोटिस जारी कर देगा। इससे सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम होंगे और कार्रवाई की गति बढ़ेगी।
सरकार ने इस पोर्टल का एंड्रॉइड और आईओएस ऐप भी लॉन्च किया है। इससे डीपीसीसी (DPCC) के अधिकारी और शहरी निकायों के कर्मचारी अपने फोन पर कहीं से भी किसी भी साइट की लाइव फीड और सेंसर डेटा देख सकेंगे। इससे निर्माण स्थलों पर जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने स्पष्ट किया है कि अब तक की निगरानी व्यवस्था में कई कमियां थीं, जिन्हें अब दूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नई एआई आधारित प्रणाली से नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रोजेक्ट्स की तुरंत पहचान की जाएगी। जो निर्माण एजेंसियां बार-बार नियमों को नजरअंदाज करेंगी, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म न केवल डेटा प्रबंधन को आसान बनाएगा, बल्कि दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में एक अहम वैज्ञानिक हथियार साबित होगा।
*AI संचालित डस्ट पोर्टल 2.0 के माध्यम से दिल्ली में निर्माण स्थलों पर धूल प्रदूषण की निगरानी अब और अधिक स्मार्ट, पारदर्शी और प्रभावी होगी।
— DIP - Delhi Government (@dip_delhi) July 14, 2026
500 वर्ग गज या उससे बड़े निर्माण स्थलों की GIS Mapping, 360° Cameras, PM10-PM2.5 Sensors और AI आधारित Real-Time Monitoring के जरिए निगरानी की… pic.twitter.com/NAkdcGWtk3
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