अयोध्या राम मंदिर चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर छिड़ा विवाद अब कानूनी और राजनीतिक गलियारों में पूरी तरह गरमा गया है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के बीच शुरू हुई यह तकरार अब एक नए मोड़ पर है।
कानूनी नोटिस का चार पन्नों में जवाब समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण कन्हैया पाल द्वारा भेजे गए मानहानि नोटिस का जवाब देते हुए निशिकांत दुबे ने इसे पूरी तरह निराधार बताया है। दुबे ने अपने अधिवक्ता के जरिए चार पन्नों का जवाब भेजा है। इसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनके किसी बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वे इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं। उन्होंने साफ किया कि यह खेद केवल विवाद को विराम देने के लिए है, इसे किसी भी तरह से अपनी गलती मानना न समझा जाए।
X पर छिड़ी माफी की जंग नोटिस के जवाब के बाद सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने दावा किया कि निशिकांत दुबे को तभी माफी मिलेगी जब वे अखिलेश यादव से माफी मांगेंगे। इस दावे के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई कि भाजपा सांसद ने अखिलेश यादव से माफी मांग ली है।
इस पर निशिकांत दुबे ने X पर मोर्चा संभालते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने अखिलेश यादव से कोई माफी नहीं मांगी है। उन्होंने सपा नेताओं पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनका जवाब केवल कानूनी नोटिस के दायरे में था।
विवाद की जड़: टिन्नू और टीपू का कनेक्शन यह पूरा विवाद 5 जुलाई को शुरू हुआ था। निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसमें दावा किया गया कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले का आरोपी टिन्नू यादव सीधे तौर पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के संपर्क में था। दुबे ने कटाक्ष करते हुए लिखा था, टिन्नू, टीपू से ही तो बात कर रहा था? इस पर अखिलेश यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए मानहानि की चेतावनी दी थी।
कौन है टिन्नू यादव और क्या है मामला? राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले का मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव पहले राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का ड्राइवर रह चुका है। एसआईटी की जांच में सामने आया है कि उसके पास बिना किसी आधिकारिक आदेश के मंदिर की हुंडियों की चाबियां थीं। इसी की सिफारिश पर चोरी के आरोपी मनीष कुमार यादव को दान गणना के काम में लगाया गया था, जिसे सुरक्षा में बड़ी सेंध माना गया।
अब यह मामला कानूनी नोटिस और सोशल मीडिया की बयानबाजी से होते हुए एक ऐसी बहस में बदल गया है, जहां दोनों पक्ष अपनी-अपनी प्रतिष्ठा को लेकर अड़े हुए हैं। निशिकांत दुबे का कहना है कि वे किसी भी तरह से झुकने को तैयार नहीं हैं, जबकि सपा इसे अपनी साख से जोड़कर देख रही है।
*वकील पाल है कि अखिलेश यादव जी । समाजवादी पार्टी को फिर मेरी सलाह है कि चाटुकारिता वाले को समझाइए । पहले तो नोटिस अखिलेश जी को देना था मानहानि का,बदले में पाल ने दिया । मैंने पूछा पाल आप कौन हो तो पाल ने दूसरे वकील से नोटिस भेजा । अब नया कहानी,मैंने अखिलेश यादवजी से कोई माफ़ी नहीं… pic.twitter.com/6M9EEst57D
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) July 13, 2026
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