NCP में पावर वॉर छिड़ा: सुनेत्रा पवार के नेतृत्व पर उठे गंभीर कानूनी सवाल, क्या प्रफुल पटेल होंगे अगले मोहरे?
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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का आंतरिक कलह अब कानूनी गलियारों तक पहुंच गया है। अजित पवार के निधन के बाद पार्टी की बागडोर संभालने वालीं सुनेत्रा पवार के खिलाफ पार्टी के ही राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने मोर्चा खोल दिया है। सात पन्नों का कानूनी नोटिस भेजकर उन्होंने सुनेत्रा पवार के अध्यक्ष बनने की पूरी प्रक्रिया को ही अवैध करार दे दिया है।

कानूनी नोटिस: क्या है संवैधानिक पेंच?

सच्चिदानंद सिंह ने अपने नोटिस में 26 फरवरी 2026 को हुए राष्ट्रीय अधिवेशन को नियम विरुद्ध बताया है। दावा है कि अजित पवार के निधन के बाद पार्टी के संविधान के अनुसार, कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल पटेल को अंतरिम जिम्मेदारी संभालनी चाहिए थी। नोटिस में मांग की गई है कि सुनेत्रा पवार का चुनाव शून्य और अस्तित्वहीन घोषित किया जाए। यह नोटिस न केवल सुनेत्रा पवार, बल्कि प्रफुल पटेल और चुनाव प्रक्रिया के नोडल अधिकारी बृजमोहन श्रीवास्तव को भी भेजा गया है।

क्या प्रफुल पटेल के समर्थन में है यह बगावत ?

इस नोटिस की टाइमिंग बेहद चौंकाने वाली है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पार्टी का एक प्रभावशाली धड़ा अभी भी प्रफुल पटेल को ही संगठन का स्वाभाविक नेता मानता है। खुद प्रफुल पटेल ने भी हालिया बयानों में सुधारात्मक कदम उठाने की बात कही है, जिसे संगठन के भीतर असंतोष को स्वीकार करने के रूप में देखा जा रहा है।

पार्थ पवार की भूमिका बनी अड़चन ?

सूत्रों के अनुसार, केवल नेतृत्व का सवाल नहीं है। अजित पवार के निधन के बाद पार्थ पवार का निर्णय प्रक्रिया में बढ़ता दखल पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को नागवार गुजर रहा है। कई पुराने नेता खुद को संगठन से हाशिए पर महसूस कर रहे हैं, जो इस नाराजगी की बड़ी वजह बताई जा रही है।

शरद पवार की सक्रियता और नए समीकरण

यह विवाद ऐसे समय पर सामने आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े उलटफेर की अटकलें हैं। शरद पवार की हालिया मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री से मुलाकात ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। क्या NCP में हो रहा यह विवाद शरद पवार की वापसी या किसी नए गठबंधन की जमीन तैयार कर रहा है? इन अटकलों ने मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।

पार्टी के सामने अब अग्निपरीक्षा

सुनेत्रा पवार का कहना है कि इस मामले पर तटकरे साहब (सुनील तटकरे) बात करेंगे। फिलहाल, NCP के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ अदालती लड़ाई है, तो दूसरी तरफ संगठन के भीतर डैमेज कंट्रोल। यदि समय रहते इस दरार को नहीं भरा गया, तो यह कानूनी विवाद पार्टी के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रफुल पटेल इस मामले में सुलह का रास्ता निकालेंगे या यह युद्ध पार्टी को दो फाड़ कर देगा।

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