नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के बालाघाट में सामने आए चावल हेराफेरी के मामले ने पिछले कुछ दिनों से सुर्खियां बटोरी हुई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में इस चावल घोटाले को 1160 करोड़ रुपये का बताया जा रहा था, लेकिन अब भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने इस पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए इन दावों को खारिज कर दिया है।
क्या है FCI का पक्ष? FCI ने सोशल मीडिया के जरिए जारी एक बयान में 1160 करोड़ रुपये के घोटाले की खबरों को तथ्यहीन और भ्रामक बताया है। निगम के अनुसार, साल 2024-25 के दौरान डिस्टिलरीज को कुल 5.39 लाख मीट्रिक टन (LMT) चावल जारी किया गया था। इस चावल की कुल कीमत लगभग 1160 करोड़ रुपये है, जो कि डिस्टिलरीज ने नियमानुसार भुगतान करके खरीदी थी। FCI का कहना है कि पूरी खरीद प्रक्रिया को घोटाला बताना गलत है।
केवल 5.63 लाख रुपये का मामला FCI ने स्पष्ट किया कि जांच का दायरा पूरे स्टॉक पर नहीं, बल्कि केवल 490 बोरी (करीब 242.50 क्विंटल) चावल पर सीमित है। इस चावल की अनुमानित कीमत मात्र 5.63 लाख रुपये है। निगम का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के तहत जो चावल आवंटित हुआ, उसमें कहीं कोई बड़ा घोटाला नहीं है, बल्कि यह एक सीमित अनियमितता का मामला है।
सरकारी तंत्र ने खुद पकड़ी गड़बड़ी FCI ने दावा किया है कि इस हेराफेरी को सार्वजनिक होने से पहले ही विभागीय निगरानी तंत्र ने पकड़ लिया था। जून 2026 के पहले सप्ताह में परिवहन के दौरान हुई अनियमितता का पता चलते ही डिस्टिलरी को नोटिस थमा दिया गया था। इसके बाद राज्य खाद्य विभाग ने तुरंत एफआईआर दर्ज कराई और मध्य प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। गड़बड़ी में शामिल राइस मिल पर 44.12 लाख रुपये का जुर्माना लगाकर उसे ब्लैकलिस्ट भी कर दिया गया है।
क्या था पूरा खेल? जांच रिपोर्ट के अनुसार, एथेनॉल प्लांटों के लिए सरकार रियायती दर (2320 रुपये प्रति क्विंटल) पर चावल उपलब्ध कराती है। आरोप है कि कुछ प्लांट संचालकों ने एथेनॉल बनाने के बजाय इस अनाज को निजी राइस मिलों को 2600 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल के मुनाफे पर बेच दिया। बालाघाट में एफसीआई गोदाम से निकला एक ट्रक जब एथेनॉल प्लांट के बजाय स्थानीय राइस मिल में मिला, तो इस गोरखधंधे का पर्दाफाश हुआ।
पुलिस और SIT की कार्रवाई जारी बालाघाट के एसपी आदित्य मिश्रा के नेतृत्व में गठित 20-25 सदस्यों वाली एसआईटी अब तक 50 से अधिक लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है। पुलिस ने मामले में अब तक 4 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि 13 से अधिक अन्य संदिग्ध पुलिस के निशाने पर हैं। फिलहाल, जांच एजेंसियां ट्रकों की आवाजाही और रिकॉर्ड का मिलान कर इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं।
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— Food Corporation of India (@FCI_India) July 13, 2026
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