अनिल मेनन: अंतरिक्ष की उड़ान भरने वाले पहले मलयाली, मंगल मिशन की राह होगी आसान
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अंतरिक्ष की दुनिया में एक और भारतीय मूल का नाम इतिहास रचने के लिए तैयार है। शुभांशु शुक्ला के बाद अब अनिल मेनन इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) की यात्रा पर निकलने वाले हैं। यह मिशन न केवल विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत और केरल के लिए भी गर्व का क्षण है।

14 जुलाई को शुरू होगा 8 महीने का मिशन अनिल मेनन 14 जुलाई को कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से रूस के सोयुज एमएस-29 अंतरिक्ष यान के जरिए उड़ान भरेंगे। उनके साथ रूसी कॉस्मोनॉट्स प्योत्र दुब्रॉव और एना किकिना भी होंगे। यह मिशन आठ महीने तक चलेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य भविष्य के मानव अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग और तकनीकी परीक्षण करना है।

कौन हैं अनिल मेनन? अनिल का जन्म अमेरिका के मिनियापोलिस में हुआ था। उनके पिता केरल से हैं और मां यूक्रेनी हैं। पेशे से इमरजेंसी डॉक्टर अनिल मेनन अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल के पद पर तैनात हैं। वे पहले ऐसे व्यक्ति होंगे जो मलयाली मूल के हैं और अंतरिक्ष यात्रा पर जाएंगे। भले ही उनका पालन-पोषण अमेरिका में हुआ, लेकिन वे अपनी जड़ों से गहराई से जुड़े हैं और सोशल मीडिया पर अक्सर मलयालम में अपनी राय साझा करते हैं।

मिशन का अहम रोल: स्पेस में IV फ्लूइड की तैयारी अनिल मेनन इस मिशन के दौरान एक बेहद क्रांतिकारी टेस्ट करेंगे। वे ISS के पीने के पानी से सुरक्षित इंट्रावेनस (IV) फ्लूइड बनाने की तकनीक का परीक्षण करेंगे। यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो भविष्य में चांद और मंगल ग्रह के लंबे मिशनों पर जाने वाले यात्रियों को भारी भरकम फ्लूइड पृथ्वी से ले जाने की आवश्यकता नहीं होगी। यह अंतरिक्ष में मेडिकल इमरजेंसी और डिहाइड्रेशन के इलाज में गेम-चेंजर साबित होगा।

AI और अल्ट्रासाउंड से खुद होगा इलाज नासा के मुताबिक, मेनन अंतरिक्ष में ऑगमेंटेड रियलिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अल्ट्रासाउंड स्कैन का परीक्षण करेंगे। इसका उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना है जिससे अंतरिक्ष यात्री भविष्य के गहरे अंतरिक्ष मिशनों में बिना पृथ्वी की मदद के अपना मेडिकल चेक-अप खुद कर सकें।

केरल में खुशी का माहौल अनिल मेनन की इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर क्रिस्टल और मेडिसिन पर उनका शोध मानव उत्कृष्टता का उदाहरण है। पूरा मलयाली समुदाय उनके सुरक्षित और सफल मिशन के लिए प्रार्थना कर रहा है।

वैज्ञानिकों की नजर इस शोध पर जीरो ग्रेविटी का मानव शरीर पर क्या असर पड़ता है, यह इस मिशन का दूसरा बड़ा पहलू है। वैज्ञानिक इस बात का अध्ययन करेंगे कि अंतरिक्ष में शरीर का ब्लड फ्लो और नसों पर क्या प्रभाव पड़ता है। इन निष्कर्षों का उपयोग आने वाली पीढ़ियों के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए किया जाएगा।

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