विंबलडन के सेंटर कोर्ट पर भावुक हुए वैभव सूर्यवंशी, युवराज सिंह को बताया अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा
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लंदन: विंबलडन का ऐतिहासिक सेंटर कोर्ट हाल ही में टेनिस के रोमांच के साथ-साथ भारतीय क्रिकेट के गुरू-शिष्य परंपरा का गवाह बना। टेनिस के फाइनल मुकाबले के दौरान जब भारतीय क्रिकेट के दिग्गज युवराज सिंह, उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी और धाकड़ ओपनर अभिषेक शर्मा एक साथ नजर आए, तो फैंस की निगाहें उन पर टिक गईं।

युवी पाजी मेरे आइडल हैं युवराज सिंह के साथ अपनी मुलाकात को याद करते हुए युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, युवराज सिंह मेरे आइडल हैं। जब मैं उनसे पहली बार मिला था, तो वह अनुभव अद्भुत था। उन्होंने मुझे खेल की बारीकियां समझाईं और भविष्य के लिए मार्गदर्शन किया। उनसे मिलना किसी सपने के सच होने जैसा है।

अभिषेक शर्मा ने साझा की यादें युवराज के मार्गदर्शन में बल्लेबाजी की कला सीखने वाले अभिषेक शर्मा ने भी वैभव की भावनाओं का समर्थन किया। अभिषेक ने कहा, मैं वैभव की खुशी को समझ सकता हूं क्योंकि युवी पाजी मेरे लिए भी प्रेरणा के स्रोत रहे हैं। उनसे पहली बार मिलने की जो घबराहट और खुशी होती है, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

वैभव का जेंटलमैन लुक बना चर्चा का विषय विंबलडन के फाइनल में वैभव सूर्यवंशी का अंदाज भी खूब सुर्खियां बटोर रहा था। ब्लैक ब्लेजर, व्हाइट शर्ट और स्ट्राइप्ड टाई में वैभव बेहद क्लासी लग रहे थे। हालांकि, वैभव ने इस लुक का पूरा श्रेय अभिषेक शर्मा को दिया। उन्होंने मजेदार लहजे में बताया, मैंने कोई खास प्लानिंग नहीं की थी, जो मिला वही पहन लिया। अभिषेक भाई ने ही सब अरेंज किया था।

टेनिस के रोमांच का लुत्फ इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में दुनिया के नंबर-1 टेनिस खिलाड़ी यानिक सिनर ने अलेक्जेंडर ज्वेरेव को हराकर अपना दूसरा विंबलडन खिताब जीता। पहला सेट हारने के बाद सिनर ने शानदार वापसी की और चार सेटों के कड़े संघर्ष में जीत दर्ज की। स्टैंड्स में बैठे भारतीय क्रिकेट की इस त्रिमूर्ति ने इस ऐतिहासिक जीत का भरपूर आनंद लिया।

भविष्य के लिए अहम दौरा क्रिकेट के मैदान पर आक्रामक बल्लेबाजी के लिए मशहूर वैभव सूर्यवंशी के लिए लंदन का यह दौरा केवल टेनिस देखने तक सीमित नहीं रहा। युवराज सिंह जैसे अनुभवी खिलाड़ी के साथ वक्त बिताना और उनसे मेंटरशिप लेना, वैभव के मानसिक और खेल कौशल को नई ऊंचाई देने वाला साबित होगा। यह मुलाकात साबित करती है कि खेल की दुनिया में उम्र और पीढ़ी का अंतर मायने नहीं रखता, केवल सीखने की ललक मायने रखती है।

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