होर्मुज स्ट्रेट में तनाव चरम पर होर्मुज स्ट्रेट में व्यावसायिक जहाजों पर बढ़ते हमलों के बाद, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी सेना ने रविवार को ईरान के पांच प्रमुख प्रांतों—होर्मुजगन, मरकाजी, खुजेस्तान, बुशहर और सिस्तान-बलूचिस्तान—पर एक साथ हवाई हमले किए हैं। इस हमले का मुख्य उद्देश्य ईरान की मिसाइल प्रणालियों और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की स्पीड बोट्स को नष्ट करना था।
जान-माल का नुकसान अमेरिकी सेंटकॉम (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई है। इस हमले के दौरान खुजेस्तान प्रांत में एक नागरिक की मौत हुई है और पांच अन्य घायल बताए जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि यह हमला ईरानी सेना को जवाबदेह ठहराने के लिए अनिवार्य था।
ईरान का पलटवार: पड़ोसी देशों को धमकी ईरानी विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन करार दिया है। तेहरान ने खाड़ी देशों को चेतावनी दी है कि यदि कोई भी देश अपनी जमीन या सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल अमेरिका को ईरान के खिलाफ करने देता है, तो उसे वैध सैन्य लक्ष्य माना जाएगा। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
UN के बयान पर तेहरान का गुस्सा ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें ईरान की जवाबी कार्रवाई को सैन्य टकराव बताया गया था। बकाई ने कहा, यह सैन्य टकराव नहीं, बल्कि अमेरिका और इजराइल द्वारा शुरू की गई आक्रामकता के खिलाफ हमारा आत्मरक्षा का अधिकार है। उन्होंने UN से अमेरिका को इन हमलों के लिए जवाबदेह ठहराने की मांग की है।
ट्रंप के दावों को बताया झूठ तेहरान ने ओमान के मस्कट में हुई हालिया बातचीत को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप के दावों को पूरी तरह झूठ बताते हुए ईरान ने कहा कि बातचीत का एजेंडा केवल समुद्री सुरक्षा और होर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन तक सीमित था, न कि किसी समझौते पर।
तनाव के मायने अमेरिका की इस व्यापक सैन्य कार्रवाई ने मध्य पूर्व में नए संघर्ष की आहट दे दी है। एक ओर अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग की सुरक्षा बता रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मानकर आक्रामक रुख अपना रहा है। क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडरा रहे इस खतरे ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
Mr. Spokesperson,
— Esmaeil Baqaei (@IRIMFA_SPOX) July 12, 2026
This is not a “military confrontation.” It is the continuation of a blatant and unprovoked act of aggression initiated on 28 February by the United States and Israel.
Iran does not “attack.” Iran’s strikes on U.S. military bases and assets stationed in the… pic.twitter.com/KQVkc2DbZL
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