भारत में मानसून पर लगा ब्रेक , क्या फिर सूखे की ओर बढ़ रहा है देश?
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भारत के कई राज्यों में मानसून की भारी बारिश के बीच, उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इन क्षेत्रों में मानसून ब्रेक की स्थिति बन गई है, जिससे अगले 6-7 दिनों तक बारिश की उम्मीद न के बराबर है।

क्या है स्थिति? मौसम का मिजाज अचानक से बदल गया है। सैटेलाइट तस्वीरें दर्शा रही हैं कि पश्चिमी घाट से लेकर देश के आंतरिक मानसूनी हिस्सों तक बादल नदारद हैं। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में भी बादलों की मौजूदगी बेहद कम है। जानकारों का कहना है कि 18-20 जुलाई से पहले मानसून के फिर से सक्रिय होने के आसार कम हैं।

दिल्ली-एनसीआर और तापमान पर असर मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून ब्रेक के दौरान आसमान साफ रहेगा और आर्द्रता (यूनिडिटी) में कमी आएगी। दिल्ली-एनसीआर समेत कई इलाकों में बारिश रुकने से तापमान 37-38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इस दौरान मानसून की गतिविधियां पहाड़ों की तलहटी तक सीमित रहेंगी, जबकि मध्य और पश्चिम भारत शुष्क बना रहेगा।

कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए संकट जुलाई का महीना खरीफ की फसलों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। मानसून के इस लंबे ब्रेक ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी मानसून सत्र में इस मुद्दे को उठाने की बात कही है, क्योंकि कमजोर मानसून खेती, जल सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है।

क्यों हो रहा है इतना लंबा मानसून ब्रेक ? आम तौर पर मानसून ब्रेक एक सामान्य प्रक्रिया है, जो जुलाई-अगस्त में एक-दो बार होती है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार स्थिति असामान्य है। इसका मुख्य कारण अल नीनो (El Niño) का प्रभाव है। अल नीनो के कारण प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ जाता है, जो वैश्विक मौसम चक्र को बिगाड़ देता है।

क्या फिर से बारिश होगी? मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जब बंगाल की खाड़ी में कोई नया चक्रवाती सिस्टम या कम दबाव का क्षेत्र बनेगा, तो वह मानसून को दक्षिण की ओर खींचेगा। 19-20 जुलाई के आसपास मानसून के दोबारा सक्रिय होने की संभावना है, जिसके बाद ही हालात में सुधार की उम्मीद है।

अमरीकी एजेंसी NOAA के अनुसार, इस साल अल नीनो का प्रभाव अधिक शक्तिशाली हो सकता है, जो 2027 की शुरुआत तक बने रहने का अनुमान है। मानसून में यह लंबा ठहराव देश में बारिश के कुल आंकड़ों को काफी नीचे ला सकता है, जो आने वाले समय में बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।

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