मोदी कैबिनेट में बड़े बदलाव की आहट? इन 2 सीक्रेट घटनाओं ने बढ़ाई हलचल
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली का सबसे बड़ा रहस्य उनका सरप्राइज एलिमेंट है। कैबिनेट विस्तार हो या संगठन में फेरबदल, उनके फैसले तब तक गोपनीय रहते हैं जब तक वे खुद इसकी घोषणा न कर दें। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में घटी दो प्रमुख घटनाओं ने एक बार फिर दिल्ली के गलियारों में हलचल मचा दी है। क्या मानसून सत्र से पहले सरकार कोई बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है?

अमित शाह की डिनर डिप्लोमेसी और कश्मीर कनेक्शन

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के रिटायर्ड डायरेक्टर तपन डेका के सम्मान में एक डिनर होस्ट किया। खुफिया विभाग के प्रमुख की विदाई को सार्वजनिक रूप से इतनी तवज्जो देना असामान्य है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि डेका को जल्द ही जम्मू-कश्मीर में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। यदि ऐसा होता है, तो वर्तमान उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की केंद्र में वापसी हो सकती है और उन्हें कैबिनेट में जगह मिल सकती है।

भूपेंद्र यादव के मंत्रालय में सफाई और विपक्ष का हमला

दूसरी महत्वपूर्ण घटना पर्यावरण मंत्रालय से जुड़ी है। मंत्री भूपेंद्र यादव के चार निजी सहयोगियों को अचानक उनके पदों से हटाए जाने ने सबको चौंका दिया है। इस प्रशासनिक फेरबदल को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गवर्नेंस फेलियर और घोटाले का संकेत करार दिया है। संगठन में कद्दावर माने जाने वाले भूपेंद्र यादव के मंत्रालय में हुई इस हलचल ने उनके भविष्य को लेकर अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।

मानसून सत्र से पहले बदलाव की कितनी संभावना?

20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के मद्देनजर बदलाव की संभावना फिलहाल कम दिख रही है, क्योंकि सरकार का पूरा ध्यान विधायी कामकाज पर है। हालांकि, जुलाई 2021 का इतिहास गवाह है कि सत्र के ठीक पहले भी बड़े बदलाव किए जा चुके हैं। जानकारों का कहना है कि अगर अभी बदलाव नहीं हुआ, तो अगस्त के अंत या सितंबर में बड़े फेरबदल की पूरी उम्मीद है।

संगठन और सरकार में नए संतुलन की तैयारी

पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन की नजरें आगामी पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों पर हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सरकार संगठन और कैबिनेट के बीच एक नया संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। जिन मंत्रियों को कैबिनेट से हटाया जाएगा, उन्हें शायद संगठन में जगह न मिले; इसके बजाय, जमीन से जुड़े नए और अनुभवी नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

मिशन 2029 और डेलिमिटेशन का मास्टर स्ट्रोक

बीजेपी इस बार चुनावी राज्यों में अभियान समितियों के जरिए एक नया प्रयोग करने जा रही है। इसका मुख्य लक्ष्य 2027 के राष्ट्रपति चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव की नींव रखना है। सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता मानसून सत्र में परिसीमन संशोधन विधेयक (Delimitation Amendment Bill) को पास कराना है, जो महिला आरक्षण को लागू करने और भविष्य की चुनावी बिसात को पलटने के लिए अनिवार्य है।

विपक्ष के अंदरूनी बिखराव के बीच, मोदी सरकार अपने इस मिशन 2029 के लिए संगठन और कैबिनेट में मेजर सर्जरी करने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही है। अब बस प्रधानमंत्री की अंतिम हरी झंडी का इंतजार है।

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