पांचना बांध विवाद: पानी की लड़ाई बनी मूंछ की जंग , इंटरनेट बंद और तनाव के साये में करौली
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करौली का पांचना बांध पानी विवाद अब केवल सिंचाई की समस्या तक सीमित नहीं रहा है। बीते दिनों प्रशासनिक समझौतों के बाद भी यह मामला अब क्षेत्रवाद और जातियों (मीणा बनाम गुर्जर) के वर्चस्व की लड़ाई में तब्दील हो गया है। विवाद ने इतना हिंसक और संवेदनशील मोड़ ले लिया है कि प्रशासन को इंटरनेट सेवाएं तक बंद करनी पड़ी हैं।

पानी की मांग से शुरू हुआ क्रेडिट वार

विवाद की जड़ 30 जून को हुआ वह समझौता है, जिसमें सात दिनों के भीतर पानी वितरण की रूपरेखा तय होनी थी। 6 जुलाई को बांध से पानी छोड़ा गया, लेकिन तकनीकी खराबी के चलते बांध का एक गेट जाम हो गया, जिससे टेल वाले गांवों तक पानी नहीं पहुंच सका। इसी दौरान पानी वितरण का श्रेय लेने की होड़ में मीणा और गुर्जर समाज आमने-सामने आ गए, जिससे यह मामला मूंछ की लड़ाई बन गया।

सोशल मीडिया पर छिड़ी अभद्र जंग

मंगलवार तक जो आंदोलन सड़कों पर जाम लगाने तक सीमित था, वह बुधवार को सोशल मीडिया पर बेहद तीखा और अभद्र हो गया। दोनों समाजों के लोगों ने एक-दूसरे के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां कीं, जिससे जिले में सांप्रदायिक तनाव फैल गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए करौली जिला प्रशासन ने इंटरनेट सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दीं और सौहार्द बिगाड़ने वालों के खिलाफ अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज की गई।

रात के अंधेरे में मंत्रियों का हस्तक्षेप

हालात बेकाबू होते देख बुधवार देर रात कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से समझाइश की और जाम खुलवाया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि समय रहते खेतों तक पानी नहीं पहुंचा, तो वे फिर से पूरे इलाके को जाम करने पर मजबूर होंगे।

क्या है सरकार का पक्ष?

गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पहले ही 52 करोड़ रुपये की लिफ्ट सिंचाई योजना को मंजूरी दी है ताकि सभी गांवों को पानी मिल सके। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के सकारात्मक फैसलों से असहज होकर कुछ लोग युवाओं और किसानों को भ्रमित कर रहे थे, लेकिन अब सभी पक्षों के साथ संवाद स्थापित हो चुका है।

प्रशासन और पुलिस की पैनी नजर

वर्तमान में पूरे करौली जिले में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। आंदोलन का नेतृत्व करने वाले नेताओं पर कड़ी नजर रखी जा रही है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य अब पानी के तकनीकी समाधान के साथ-साथ सोशल मीडिया के जरिए फैल रही नफरत पर नकेल कसना है।

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