प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर हैं। भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से ऑस्ट्रेलिया एक बेहद महत्वपूर्ण साझेदार है। अपनी खनिज संपदा के कारण ऑस्ट्रेलिया आज विश्व अर्थव्यवस्था का पावरहाउस बनकर उभरा है। आइए जानते हैं कि ऑस्ट्रेलिया की धरती के नीचे आखिर ऐसा क्या छिपा है, जो उसे दुनिया के सबसे समृद्ध देशों की कतार में खड़ा करता है।
ऑस्ट्रेलिया दुनिया का सबसे बड़ा लौह अयस्क निर्यातक है। मुख्य रूप से पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पिलबारा क्षेत्र में मिलने वाला यह अयस्क इस्पात उद्योग की रीढ़ है। इसके पास करीब 50-55 अरब टन का विशाल भंडार है, जो वैश्विक आपूर्ति का 30 प्रतिशत हिस्सा है। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश इसके सबसे बड़े खरीदार हैं।
कोयला और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) ऑस्ट्रेलिया की विदेशी मुद्रा का बड़ा स्रोत हैं। क्वींसलैंड और न्यू साउथ वेल्स की खदानें न केवल घरेलू बिजली की जरूरतें पूरी करती हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बड़ी भूमिका निभाती हैं। इनके पास करीब 150 अरब टन का कोयला भंडार मौजूद है।
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया का कालगूर्ली क्षेत्र सोने के उत्पादन के लिए विश्व प्रसिद्ध है। करीब 12 हजार टन के अनुमानित भंडार के साथ ऑस्ट्रेलिया सोने की वैश्विक आपूर्ति में लगभग 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है। बढ़ती वैश्विक मांग और निवेश के कारण यह ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था को निरंतर मजबूती दे रहा है।
इलेक्ट्रिक वाहनों और ग्रीन एनर्जी की क्रांति ने ऑस्ट्रेलिया को भविष्य का सबसे बड़ा खिलाड़ी बना दिया है। ऑस्ट्रेलिया दुनिया का सबसे बड़ा लिथियम उत्पादक है, जिसकी वैश्विक उत्पादन में करीब 45-50 प्रतिशत हिस्सेदारी है। भविष्य की तकनीक के लिए यह खनिज ऑस्ट्रेलिया का सबसे कीमती ट्रंप कार्ड है।
परमाणु ऊर्जा के लिए आवश्यक यूरेनियम का ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया का सबसे बड़ा भंडार (करीब 17 लाख टन) है। इसके अलावा, रक्षा, आधुनिक कंप्यूटर और मोबाइल चिप्स में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ मिनरल्स का बड़ा जखीरा भी ऑस्ट्रेलिया के पास है। ओलंपिक डैम जैसी खदानें इसकी वैश्विक पहचान का प्रतीक हैं।
ऑस्ट्रेलिया की जीडीपी में खनन क्षेत्र का सीधा योगदान करीब 9-10 प्रतिशत है, लेकिन अगर लॉजिस्टिक्स, इंजीनियरिंग और वित्तीय सेवाओं जैसे परोक्ष प्रभावों को जोड़ें, तो यह प्रभाव 15 प्रतिशत से भी अधिक हो जाता है। देश के कुल निर्यात का 55-65 प्रतिशत हिस्सा खनिज और ऊर्जा संसाधनों से ही आता है।
आज जब पूरी दुनिया स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रही है, तो लिथियम, निकल और तांबे जैसे खनिजों की उपलब्धता ने ऑस्ट्रेलिया को वैश्विक सप्लाई चेन का केंद्र बना दिया है। यही कारण है कि दुनिया भर की नजरें इस देश पर टिकी हैं।
Landed in Melbourne, Australia. This visit will add vigour to the India-Australia Comprehensive Strategic Partnership. I look forward to the talks with Prime Minister Albanese. I will also have the opportunity to interact with the Indian diaspora which is an important pillar of… pic.twitter.com/Qu8BeAAeGm
— Narendra Modi (@narendramodi) July 8, 2026
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