मध्य पूर्व में महायुद्ध का बिगुल: ईरान-अमेरिका का शांति समझौता खत्म, दुनिया पर मंडराया तेल संकट
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मध्य पूर्व एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा है। अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुआ शांति समझौता आधिकारिक रूप से टूट चुका है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों पर हुए हमलों के बाद दोनों देशों के बीच छिड़ा सैन्य टकराव अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन गया है।

हमले और पलटवार की पूरी कहानी विवाद की शुरुआत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कतर और सऊदी अरब के कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों से हुई। अमेरिका ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया और जवाब में ईरान के रडार सिस्टम, एंटी-शिप मिसाइल और ड्रोन साइटों पर व्यापक हवाई हमले किए। बुशहर, बंदर अब्बास और केशम द्वीप पर हुए इन धमाकों को अमेरिका ने सजा करार दिया है।

ईरान का आक्रामक रुख ईरान ने भी पीछे न हटते हुए पलटवार किया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने बहरीन और कुवैत में 85 अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। कुवैत और बहरीन में मिसाइल अलर्ट के सायरन बज उठे, और कुवैत ने अपने डिफेंस सिस्टम से कई दुश्मन मिसाइलें मार गिराने की पुष्टि की है। ईरान ने अमेरिका के एक MQ-9 ड्रोन को भी मार गिराया है।

ट्रंप का कड़ा रुख: अब कोई बातचीत नहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुई शांति डील को खत्म करने की घोषणा कर दी है। अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन से इतर ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अब तेहरान के साथ बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा, मेरे लिए यह मामला खत्म हो चुका है। मैं अब उनसे कोई बातचीत नहीं करना चाहता। साथ ही ट्रंप ने नाटो सहयोगियों के सुस्त रवैये पर भी गहरी निराशा जताई।

क्यों लौट सकता है तेल और गैस का संकट? इस पूरे विवाद का केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है, जहां से दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल और LNG गुजरता है। ईरान पहले भी इस समुद्री रास्ते को ब्लॉक करने की धमकी दे चुका है।

  1. सप्लाई में बाधा: युद्ध के कारण कमर्शियल जहाजों का इस रास्ते से गुजरना अब बेहद खतरनाक हो गया है।
  2. बीमा प्रीमियम: जहाजों का इंश्योरेंस महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी।
  3. महंगाई की मार: अमेरिका द्वारा ईरान के तेल निर्यात पर लगी रोक हटाने का लाइसेंस रद्द करने से बाजार में कच्चे तेल की भारी किल्लत हो सकती है।

यदि इस टकराव को जल्द नहीं रोका गया, तो भारत जैसे देशों के लिए पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि और ईंधन की किल्लत का संकट एक बार फिर सिर उठा सकता है। वैश्विक ऊर्जा बाजार फिलहाल भारी अनिश्चितता के दौर में है।

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