राम मंदिर चंदे में भ्रष्ट खेल का आरोप: दिग्विजय सिंह ने पूछा- ED अब कहां है?
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अयोध्या के राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित किए गए चंदे और दान में हेराफेरी के आरोपों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस पूरे मामले को लेकर केंद्र सरकार और बीजेपी पर तीखा हमला बोला है।

धर्म का व्यापार कर रहे ये लोग दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के नाम पर धर्म का व्यापार किया जा रहा है। उन्होंने सिंधी समुदाय का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने दो क्विंटल वजन की 200 शिलाएं दान की थीं, लेकिन उन्हें रसीद तक नहीं दी गई। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, ये भ्रष्ट लोग किसी को नहीं बख्शेंगे, ये धर्म को व्यापार की वस्तु बना चुके हैं।

चंपत राय और नृपेंद्र मिश्रा पर सवालिया निशान सिंह ने राम मंदिर ट्रस्ट के चंपत राय को सीधे तौर पर मोहन भागवत का खास बताया। उन्होंने दावा किया कि चंपत राय को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंकी जाएगी। इसके अलावा, उन्होंने नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण कार्य में 40% कमीशन का खेल चल रहा था और पत्थर सप्लायर को भी मुफ्त में पत्थर देने से रोका गया।

ED खामोश क्यों? दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार की जांच एजेंसियों पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, नेशनल हेराल्ड केस में कोई कैश लेन-देन नहीं था, फिर भी ED को पीछे लगा दिया गया। लेकिन राम मंदिर के मामले में खुलेआम पैसे की हेराफेरी हो रही है, तो ED के अधिकारी कहां हैं? उन्होंने कहा कि वे खुद इस मामले की शिकायत प्रवर्तन निदेशालय (ED) से करने की तैयारी कर रहे हैं।

मैं कांग्रेस में हूं, पर राम भक्त हूं अपनी राजनीतिक पहचान पर बोलते हुए दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि वे भले ही कांग्रेस के सदस्य हैं, लेकिन भगवान राम के समर्पित भक्त भी हैं। उन्होंने कहा कि उनका परिवार दशकों से धर्म और मंदिरों से जुड़ा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई सनातन धर्म के नाम पर हो रहे व्यापार और भ्रष्टाचार के खिलाफ है, न कि आस्था के खिलाफ।

SIT की निष्पक्षता पर संदेह दिग्विजय सिंह ने अपनी 10 साल की मुख्यमंत्री पद की कार्यप्रणाली का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें अच्छी तरह पता है कि SIT (विशेष जांच दल) कैसे काम करती है और उसमें कौन शामिल होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री मोदी और मोहन भागवत का दबाव है, जिससे निष्पक्ष जांच की उम्मीद कम है।

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