क्या वर्ल्ड कप हीरो संजू सैमसन का करियर 12 गेंदों में खत्म कर दिया गया?
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टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत को चैंपियन बनाने में संजू सैमसन की भूमिका अहम थी। नॉकआउट मैचों में लगातार तीन मैच-विनिंग पारियों (97*, 89, 89) के साथ वे टूर्नामेंट के हीरो बनकर उभरे। लेकिन आज, उसी वर्ल्ड कप विनर को महज तीन मैचों की खराब फॉर्म के आधार पर टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

12 गेंदें और एक चैंपियन का अंत

टी20 क्रिकेट में 12 गेंदें मैच का रुख बदल सकती हैं, लेकिन संजू सैमसन के लिए ये 12 गेंदें उनके करियर पर भारी पड़ गईं। आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर लगातार फ्लॉप (5, 0 और 1 रन) होने के बाद सिलेक्टर्स ने उन्हें जिम्बाब्वे दौरे से भी ड्रॉप कर दिया। वर्ल्ड कप जिताने वाले खिलाड़ी को इतनी जल्दी दरकिनार करना भारतीय क्रिकेट के उस सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है, जो पिछले कुछ समय से अपने ही मैच-विनर्स को बैक करने में हिचकिचा रहा है।

फीयरलेस क्रिकेट बनाम इनसिक्योरिटी

गौतम गंभीर और श्रेयस अय्यर की नई लीडरशिप टीम में फीयरलेस क्रिकेट का कल्चर बनाना चाहती है। उनका संदेश साफ है: बिना दबाव के खेलो। लेकिन जब ड्रेसिंग रूम में यह संदेश जाए कि सिर्फ दो-तीन मैचों की विफलता के बाद बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा, तो खिलाड़ियों में असुरक्षा (Insecurity) पैदा होना स्वाभाविक है। ऐसे माहौल में खिलाड़ी रिस्क लेने के बजाय सेफ क्रिकेट खेलने को मजबूर हो जाएंगे, जो टीम इंडिया के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

वैभव सूर्यवंशी का उदय और टीम का असंतुलन

युवा प्रतिभा वैभव सूर्यवंशी का डेब्यू शानदार है और प्रशंसक उनके मुरीद हैं। लेकिन सवाल यह है कि एक युवा को मौका देने के लिए क्या संजू जैसे अनुभवी खिलाड़ी को बलि का बकरा बनाना जरूरी था? टीम में इस समय लेफ्ट-हैंडेड बल्लेबाजों की भरमार हो गई है, जिससे टीम का संतुलन बिगड़ रहा है। संजू एक राइट-हैंडेड बल्लेबाज के तौर पर टीम को जो विविधता और मिडिल-ऑर्डर की स्थिरता दे सकते थे, उसे नजरअंदाज करना टीम मैनेजमेंट की बड़ी चूक हो सकती है।

हार का सारा ठीकरा संजू पर क्यों?

आयरलैंड के खिलाफ हार के बाद पूरे मैनेजमेंट और टीम की जवाबदेही तय करने के बजाय सारा दोष संजू सैमसन पर मढ़ दिया गया। अगर टीम हारती है, तो जिम्मेदारी कप्तान और कोच की भी होती है। केवल एक खिलाड़ी को ड्रॉप कर देने से समस्या हल नहीं होगी। क्या इंग्लैंड दौरे पर हार की स्थिति में भी गंभीर और श्रेयस से सवाल नहीं पूछे जाएंगे?

क्या यह संजू के करियर का एंडगेम है?

संजू सैमसन का करियर हमेशा उतार-चढ़ाव वाला रहा है, लेकिन उन्होंने हर बार शानदार वापसी की है। हालांकि, इस बार स्थिति अलग है। जब आप अपने करियर की बेस्ट फॉर्म और वर्ल्ड कप जीतने के कॉन्फिडेंस के साथ बाहर किए जाते हैं, तो यह मानसिक रूप से तोड़ देता है। यदि बीसीसीआई और टीम मैनेजमेंट इसी तरह चलता रहा, तो भारत में मैच-विनर्स बनाने का सिस्टम पूरी तरह खत्म हो जाएगा। संजू की वापसी अब केवल उनके प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि चयनकर्ताओं के दृष्टिकोण पर निर्भर करती है।

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