80 की उम्र, राजनीति से संन्यास और धर्म का रास्ता: दिग्विजय सिंह ने दिए बड़े संकेत
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मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अपनी भविष्य की सियासी राह को लेकर चौंकाने वाला ऐलान किया है। 80 वर्ष की आयु पूरी कर चुके दिग्विजय ने सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बनाने और अपना शेष जीवन धर्म की रक्षा के लिए समर्पित करने के संकेत दिए हैं।

पार्टी ने सब कुछ दिया, अब कोई महत्वाकांक्षा नहीं दिग्विजय सिंह ने अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए भावुक अंदाज में कहा, मैं अब 80 साल का हो चुका हूं। मुझे मेरी पार्टी ने सब कुछ दिया है—विधायक से लेकर मुख्यमंत्री और सांसद तक। अब मेरी कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं बची है। उन्होंने खुलासा किया कि राज्यसभा चुनाव के समय भी उन्होंने संगठन से कहा था कि अब उनकी जगह किसी नए चेहरे को मौका मिलना चाहिए।

दशहरे से शुरू होगी गैर-राजनीतिक यात्रा दिग्विजय सिंह ने अपनी प्रस्तावित यात्रा की तारीखों में बदलाव की घोषणा की है। पहले यह यात्रा 2 अक्टूबर को शुरू होनी थी, लेकिन अब यह दशहरे (विजयादशमी) के दिन से शुरू होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से धार्मिक यात्रा होगी, जिसमें कांग्रेस या किसी भी दल का झंडा नहीं लहराया जाएगा। इसमें सर्वधर्म समभाव का संदेश देने के लिए सभी धर्मों के झंडे शामिल होंगे।

कारसेवक बनेंगे यात्रा के चीफ गेस्ट इस यात्रा का सबसे दिलचस्प पहलू इसके मुख्य अतिथि हैं। दिग्विजय सिंह ने अयोध्या आंदोलन के दौरान चर्चा में आए कारसेवक संतोष दुबे को यात्रा का चीफ गेस्ट बनाने का ऐलान किया है। संतोष दुबे को मुख्य अतिथि बनाकर दिग्विजय ने एक बड़ा और हैरान कर देने वाला सियासी दांव खेला है, जिस पर अब राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

क्या है इस धार्मिक टर्न के सियासी मायने? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिग्विजय सिंह का यह कदम कांग्रेस में हो रहे जेनरेशन शिफ्ट (पीढ़ी परिवर्तन) का हिस्सा है। वे अब संसदीय राजनीति से किनारा कर खुद को एक मार्गदर्शक की भूमिका में ढालने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, उनकी यह गैर-राजनीतिक यात्रा असल में मध्यप्रदेश की राजनीति में क्या रंग लाएगी और इसके क्या परिणाम होंगे, यह आने वाला समय ही बताएगा।

अंतिम सांस तक धर्म की रक्षा हाल ही में एक बयान में उन्होंने साफ किया था कि वे सनातन धर्म, भाजपा, वीएचपी और आरएसएस को बखूबी समझते हैं। उनका स्पष्ट कहना है, मेरा अब सिर्फ एक मिशन है—धर्म की रक्षा करना। मैं अपनी अंतिम सांस तक आस्था की रक्षा के लिए काम करता रहूंगा।

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