श्रीराम जन्मभूमि मंदिर: एसआईटी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, 70 बार कैमरे में कैद हुई चढ़ावे की चोरी
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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा गणना कक्ष में हुई वित्तीय अनियमितताओं और चोरी के मामले में एसआईटी (SIT) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट ने हड़कंप मचा दिया है। ट्रस्ट के सामने पेश की गई इस 9 पन्नों की रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया गबन और चोरी की पुष्टि हुई है।

70 बार कैमरे में कैद हुई चोरी जांच में 27 अप्रैल से 5 जून तक के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिसमें कर्मचारी नोटों की गड्डियां और खुले नोट छिपाते हुए रंगे हाथों पकड़े गए। रिपोर्ट के मुताबिक, गणना कर्मियों द्वारा ऐसी संदिग्ध गतिविधियां करीब 70 बार की गईं। 27 अप्रैल से पहले भी गड़बड़ी के संकेत मिले हैं, लेकिन उस अवधि का फुटेज न होने से सही नुकसान का आकलन करना मुश्किल है।

सुरक्षा नियमों की अनदेखी बनी वजह गबन की यह घटनाएं सुरक्षा प्रोटोकॉल में ढील के कारण संभव हो सकीं। गणना कक्ष में प्रवेश और निकास के दौरान अनिवार्य तलाशी, निर्धारित वेशभूषा और निजी सामान पर प्रतिबंध जैसे नियमों का पालन नहीं किया गया। 6 फरवरी 2025 की एसओपी (SOP) में अनिवार्य तलाशी को बदलकर रैंडम तलाशी कर देना इस बड़ी लापरवाही का मुख्य कारण बना।

अधिकारियों की पर्यवेक्षणीय विफलता रिपोर्ट में डॉ. अनिल मिश्रा और प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। डॉ. मिश्रा पर निगरानी में कमी और सुभाष श्रीवास्तव पर सुरक्षा व्यवस्था को धरातल पर न उतार पाने का आरोप है। वहीं, बैंक अधिकारियों ने भी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई; न तो कर्मचारियों के लिए यूनिफॉर्म सुनिश्चित की गई और न ही अधिकारियों के मासिक रोटेशन के नियम का पालन हुआ।

टिन्नू यादव की संदिग्ध भूमिका जांच में रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव की भूमिका सबसे संदिग्ध पाई गई। बिना किसी लिखित प्राधिकार के उनके पास मंदिर परिसर की हुंडियों की चाबियां थीं। उन्होंने अपने रिश्तेदार को गणना ड्यूटी पर रखवाया, जिसे कथित गबन में सीधे शामिल माना जा रहा है। साथ ही, ऑडिट की सिफारिशों के बावजूद सीसीटीवी फुटेज का बैकअप 180 दिन के बजाय केवल 45 दिन रखा जाना बड़ी प्रशासनिक चूक है।

आठ लोगों पर एफआईआर की सिफारिश एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है। इनमें टिन्नू यादव और सुरक्षा प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव समेत वे सभी कर्मचारी शामिल हैं, जिनकी भूमिका गबन में पाई गई है। फिलहाल विस्तृत जांच जारी है, जिसके बाद प्रशासनिक जवाबदेही और संस्थागत खामियों पर अंतिम रिपोर्ट सौंपी जाएगी।

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