क्या फीफा पर हावी हैं ट्रंप! बेलोगुन के निलंबन पर बवाल, यूएफा और बेल्जियम ने उठाए सवाल
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फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बेलोगुन के निलंबन को लेकर मचे विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी बातचीत के दौरान उन्होंने साफ कर दिया था कि यह मामला पूरी तरह से फीफा के स्वतंत्र न्यायिक निकाय के अधीन है।

इन्फेंटिनो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, मैंने राष्ट्रपति को समझाया कि फीफा की एक स्थापित कानूनी प्रक्रिया है। हमारे स्वतंत्र निकाय सही समय पर इस पर फैसला लेंगे। यह फीफा के सिद्धांत हैं जिनका मैं हमेशा पालन करूंगा।

ट्रंप की सफाई और लॉबिंग के आरोप बेलोगुन को बोस्निया-हर्जेगोविना के खिलाफ मैच में रेड कार्ड मिला था, जिसके बाद उन पर एक मैच का प्रतिबंध लगा था। हालांकि, फीफा ने यह प्रतिबंध हटा लिया, जिससे वह बेल्जियम के खिलाफ खेलने के लिए उपलब्ध हो गए।

ट्रंप ने स्वीकार किया कि उन्होंने इन्फेंटिनो से बात की थी। उन्होंने व्हाइट हाउस में कहा, मैंने बस समीक्षा करने के लिए कहा था। मुझे नहीं लगा कि वह फाउल था। आलोचकों का मानना है कि ट्रंप का यह हस्तक्षेप फीफा की स्वायत्तता पर सीधा हमला है।

यूएफा और बेल्जियम का कड़ा विरोध यह विवाद अब 96 साल के विश्व कप इतिहास का सबसे बड़ा मामला बनता जा रहा है। बेल्जियम फुटबॉल महासंघ ने फीफा के फैसले पर गहरी चिंता जताई है। बेल्जियम का कहना है कि अपील प्रक्रिया में पारदर्शिता और अच्छी नीयत का अभाव रहा है।

यूएफा ने इस फैसले को समझ से बाहर और अनुचित करार दिया है। यूएफा का कहना है कि नियमों के साथ इस तरह का समझौता खेल की ईमानदारी और प्रतियोगिता की विश्वसनीयता को खतरे में डालता है।

क्या दांव पर है खेल की साख? विश्व कप के दौरान हुई इस राजनीतिक गहमागहमी ने फुटबॉल जगत को दो गुटों में बांट दिया है। नॉर्वे के कोच स्टेल सोलबक्केन ने कड़े शब्दों में कहा, यह बहुत ही बुरा फैसला है जो विश्व कप की गरिमा को नुकसान पहुंचाएगा।

सिएटल में अमेरिका और बेल्जियम के बीच होने वाले नॉकआउट मुकाबले से ठीक पहले उठे इस विवाद ने फीफा के सामने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि क्या फीफा की अपनी निष्पक्षता बची रहेगी या राजनीतिक दबाव के आगे नियम झुकते रहेंगे।

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